सुप्रीम कोर्ट की जज ने केंद्र-राज्य संबंधों पर महत्वपूर्ण विचार साझा किए
केंद्र-राज्य संबंध दलगत राजनीति नहीं, संविधान से तय होंगे, जस्टिस नागरत्ना ने क्यों कही ये बात?
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने केंद्र-राज्य संबंधों को संविधान से संचालित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राज्यों को 'अधीनस्थ' नहीं, बल्कि 'समकक्ष इकाइयों' के रूप में देखा जाना चाहिए। इस प्रकार के दृष्टिकोण से विकास और शासन में भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- 01केंद्र-राज्य संबंध संविधान से तय होंगे, दलगत राजनीति से नहीं।
- 02राज्यों को 'अधीनस्थ' नहीं, 'समकक्ष इकाइयों' के रूप में देखा जाना चाहिए।
- 03विकास योजनाओं में नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- 04राजनीतिक शक्ति किसी एक केंद्र में केंद्रित नहीं हो सकती।
- 05संविधान में शक्तियों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है।
Advertisement
In-Article Ad
नई दिल्ली में आयोजित डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान में, सुप्रीम कोर्ट की जज जस्टिस बीवी नागरत्ना ने केंद्र-राज्य संबंधों पर महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संघीय ढांचा संविधान से संचालित होता है, न कि राजनीतिक दलों की सत्ता के आधार पर। जस्टिस नागरत्ना ने राज्यों को 'अधीनस्थ' नहीं, बल्कि 'समकक्ष इकाइयों' के रूप में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि विकास योजनाओं और प्रशासनिक फैसलों में किसी भी राज्य के नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उनका यह भी मानना है कि राजनीतिक शक्ति किसी एक केंद्र में केंद्रित नहीं हो सकती, और संविधान में शक्तियों का संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इसके साथ ही, सुप्रीम कोर्ट की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने केरल के शबरिमला मंदिर मामले में सुनवाई की जानकारी भी दी।
Advertisement
In-Article Ad
यह टिप्पणी केंद्र-राज्य संबंधों में संवैधानिक दृष्टिकोण को मजबूत करने का प्रयास है, जिससे राज्यों के नागरिकों के साथ भेदभाव को रोका जा सके।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि केंद्र-राज्य संबंधों में संविधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए?
Connecting to poll...
More about सुप्रीम कोर्ट
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।
-1775389014840.webp)



-1775388680759.webp)
