केंद्र सरकार की सलाह: किसानों को फसल विविधीकरण की दिशा में बढ़ने की आवश्यकता
... तो रुकेगी MSP, केंद्र की राज्यों को सलाह? जानें क्यों सरकार चाहती है कि किसान बदलें खेती का तरीका
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केंद्र सरकार ने राज्यों को सलाह दी है कि वे दालों, तिलहन और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा दें। यह कदम खाद्य सुरक्षा और कृषि में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। सरकार ने गेहूं और धान की मोनोकल्चर को रोकने के लिए फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है।
- 01केंद्र सरकार ने राज्यों को फसल विविधीकरण के लिए सलाह दी है।
- 02दालों और तिलहन के उत्पादन में वृद्धि से खाद्य सुरक्षा में सुधार होगा।
- 03गेहूं और धान की खेती पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
- 04केंद्र ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएँ लागू की हैं।
- 05यह सलाह राज्यों पर कोई दबाव नहीं है, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है।
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केंद्र सरकार ने राज्यों के मुख्य सचिवों को सलाह दी है कि वे अपनी 'बोनस नीति' को इस तरह बनाएं कि दालों, तिलहन और मोटे अनाजों के उत्पादन को बढ़ावा मिले। यह कदम खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने और कृषि में आत्मनिर्भरता लाने के लिए आवश्यक है। वर्तमान में, उत्तर भारत के कई राज्यों में गेहूं और धान की खेती पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है, जिससे दालों और तिलहन की खेती घट रही है। केंद्र का मानना है कि फसल विविधीकरण से न केवल किसानों को लाभ होगा, बल्कि यह देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। 'आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26' के अनुसार, खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता 2015-16 में 63.2% से घटकर 2023-24 में 56.25% रह गई है। इसके अलावा, पीएम-किसान योजना और पीएम फसल बीमा योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से किसानों की आय और सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। केंद्र ने यह स्पष्ट किया है कि यह सलाह राज्यों पर कोई दबाव नहीं है, बल्कि एक साझा जिम्मेदारी है।
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यदि किसान दालों और तिलहन की खेती की ओर बढ़ते हैं, तो इससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है और खाद्य तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी।
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