निमगुल गांव में ढोंगी बाबाओं की एंट्री पर बैन, महिलाओं ने लिया सख्त फैसला
अशोक खरात कांड का असर, महाराष्ट्र के इस गांव में बाबाओं की एंट्री बैन, महिलाओं ने लिया फैसला
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महाराष्ट्र के धुले जिले के निमगुल गांव की महिलाओं ने अशोक खरात कांड के बाद एकजुट होकर निर्णय लिया है कि अब गांव में किसी भी ढोंगी बाबा की एंट्री नहीं होगी। यह कदम अंधविश्वास के खिलाफ एक संगठित लड़ाई का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों से अवगत कराना है।
- 01निमगुल गांव की महिलाओं ने ढोंगी बाबाओं की एंट्री पर बैन लगाया।
- 02अशोक खरात कांड ने महिलाओं को संगठित होने के लिए प्रेरित किया।
- 03अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने महिलाओं को कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक किया।
- 04गांव में सख्त निगरानी की जाएगी, किसी भी बाबा के घुसने पर कार्रवाई होगी।
- 05यह फैसला पूरे महाराष्ट्र में मिसाल बन रहा है।
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महाराष्ट्र के धुले जिले के निमगुल गांव की महिलाओं ने हाल ही में अशोक खरात कांड के बाद एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने पंचायत में प्रस्ताव पास कर कहा है कि अब गांव में किसी भी ढोंगी बाबा को कदम रखने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इस कांड ने महिलाओं के यौन शोषण और ठगी की घटनाओं को उजागर किया है, जिससे गांव की महिलाएं एकजुट हुई हैं। अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति (ANIS) ने भी इस मुहिम में महिलाओं का समर्थन किया है, उन्हें जादू-टोना विरोधी कानूनों से अवगत कराते हुए। अब गांव में सख्त निगरानी की जाएगी, और किसी भी बाबा के घुसने पर महिलाएं कानूनी कार्रवाई करेंगी। यह कदम पूरे महाराष्ट्र में एक मिसाल बन रहा है, जो दिखाता है कि जब महिलाएं संगठित होती हैं, तो अंधविश्वास और पाखंड की जड़ें कमजोर पड़ जाती हैं।
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यह निर्णय स्थानीय महिलाओं को सुरक्षा और आत्मनिर्भरता प्रदान करता है, जिससे वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो रही हैं।
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