सुप्रीम कोर्ट ने तीखी बहस में अपशब्दों के उपयोग को अश्लीलता नहीं माना
तीखी बहस में केवल अपशब्दों का प्रयोग अश्लीलता का अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि तीखी बहस में अपशब्दों का उपयोग भारतीय दंड संहिता की धारा 294(बी) के तहत 'अश्लीलता' नहीं मानी जाएगी। कोर्ट ने एक मामले में गैर-इरादतन हत्या की सजा को घटाकर तीन साल किया और सह-आरोपित की सजा रद कर दी।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने तीखी बहस में अपशब्दों के उपयोग को अश्लीलता नहीं माना।
- 02अश्लीलता की परिभाषा में केवल यौन उत्तेजना पैदा करने वाले शब्द शामिल हैं।
- 03कोर्ट ने एक मामले में गैर-इरादतन हत्या की सजा को घटाया।
- 04सह-आरोपित की सजा को रद किया गया।
- 05कोर्ट ने मुख्य दोषी को शेष सजा काटने का निर्देश दिया।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि तीखी बहस के दौरान अपशब्दों का उपयोग भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 294(बी) के तहत 'अश्लीलता' नहीं मानी जाएगी। जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी शब्द को अश्लील तभी माना जा सकता है जब वह यौन उत्तेजना पैदा करे। कोर्ट ने एक मामले में पाया कि 2014 में तमिलनाडु में दो करीबी रिश्तेदारों के बीच विवाद के दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई थी। कोर्ट ने मुख्य आरोपित की सजा को गैर-इरादतन हत्या के तहत पांच साल से घटाकर तीन साल कर दिया। सह-आरोपित की सजा को रद कर दिया गया, जबकि उसे चोट पहुंचाने के लिए धारा 324 के तहत सजा दी गई, जो पहले से काटी गई जेल की अवधि तक सीमित है।
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इस निर्णय से तीखी बहस में अपशब्दों के उपयोग पर कानूनी दृष्टिकोण में बदलाव आएगा, जिससे लोग अपनी अभिव्यक्ति में अधिक स्वतंत्रता महसूस कर सकते हैं।
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