ईरानी राजदूत का भारत की शांति भूमिका पर बयान, संघर्ष के बीच संवाद की आवश्यकता
'शांति स्थापना में भारत की भूमिका बेहद प्रभावी', मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच ईरानी राजदूत का बयान
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ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत की संयम और संवाद की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत जैसे देश शांति स्थापना में 'अत्यंत प्रभावी भूमिका' निभा सकते हैं। उन्होंने ईरान के रुख को जिम्मेदार बताते हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की।
- 01ईरानी राजदूत ने भारत की शांति स्थापना में भूमिका की सराहना की।
- 02ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन आत्मरक्षा का अधिकार रखता है।
- 03अमेरिका और इजरायल के हमलों की निंदा की गई।
- 04चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
- 05ईरान की प्राथमिकता अपनी सीमाओं की रक्षा करना है।
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ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने भारत की भूमिका की प्रशंसा की है, खासकर पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के संदर्भ में। उन्होंने कहा कि भारत जैसे देश तनावपूर्ण स्थितियों में शांति स्थापना के लिए 'अत्यंत प्रभावी भूमिका' निभा सकते हैं। फथाली ने ईरान के रुख को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन यदि युद्ध थोपा गया तो इसका अंत ईरान की शर्तों पर होगा। उन्होंने अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान की संप्रभुता का उल्लंघन करने और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की। चाबहार बंदरगाह को क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे एकतरफा प्रतिबंधों से प्रभावित नहीं होना चाहिए। फथाली ने यह भी स्पष्ट किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पारगमन ईरान और ओमान द्वारा तय किया जाएगा और यह केवल उन देशों के लिए बंद है जो ईरान के साथ युद्ध में हैं।
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