मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता का विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा
मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता की तैयारी जोरों पर, मानसून सत्र में पेश होगा विधेयक
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मध्य प्रदेश सरकार समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को जुलाई-अगस्त 2023 में विधानसभा के मानसून सत्र में पेश करने की तैयारी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जाएगी जो 45 दिनों में कानून के प्रावधानों का अध्ययन करेगी।
- 01यूसीसी का विधेयक जुलाई-अगस्त 2023 में पेश किया जाएगा।
- 02सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति का गठन होगा।
- 03आदिवासियों को कानून के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।
- 04महिलाओं के अधिकारों पर यूसीसी का महत्वपूर्ण प्रभाव होगा।
- 05भाजपा और कांग्रेस के बीच इस मुद्दे पर सियासत तेज हो गई है।
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मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। इसे विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा, जो 45 दिनों में कानून के प्रावधानों का अध्ययन करेगी। आदिवासियों को इस कानून के दायरे से बाहर रखने की संभावना है, ताकि उनके रीति-रिवाजों को सुरक्षित रखा जा सके। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दिसंबर 2022 में यूसीसी लागू करने की घोषणा की थी। यूसीसी का सबसे बड़ा प्रभाव महिलाओं के अधिकारों पर पड़ेगा, जिसमें लड़कियों को पिता की संपत्ति में समान अधिकार मिलेंगे और बहुविवाह पर रोक लगेगी। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत भी तेज हो गई है, जहां भाजपा इसे जनसंख्या नियंत्रण के लिए आवश्यक मानती है, वहीं कांग्रेस इसे मुद्दों से ध्यान भटकाने का माध्यम बताती है।
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यूसीसी लागू होने से महिलाओं को संपत्ति और अधिकारों में समानता मिलेगी, जिससे उनके सामाजिक स्थिति में सुधार होगा।
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