पश्चिम बंगाल में पहचान साबित करने में असफल छह लोगों ने राष्ट्रपति से मांगी इच्छामृत्यु
'भारतीय होने का सबूत मांगने से अच्छा था मौत दे देते', पश्चिम बंगाल के 6 लोगों ने राष्ट्रपति को लिखा खत
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पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के आरामबाग में छह लोगों ने राष्ट्रपति को अपनी इच्छामृत्यु की गुहार लगाई है। इन लोगों का नाम एसआईआर की लिस्ट से कटने के बाद उन्हें अजनबी की तरह महसूस हो रहा है। यह घटना प्रशासनिक जटिलताओं और नागरिकता के मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाती है।
- 01छह बुजुर्गों ने राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग की है।
- 02इनका नाम एसआईआर की लिस्ट से काट दिया गया है, जिससे वे मानसिक तनाव में हैं।
- 03इनमें एक रिटायर्ड हेडमिस्ट्रेस और एक कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल शामिल हैं।
- 04लोगों ने पहचान साबित करने के लिए ठोस दस्तावेज लटकाए हैं।
- 05इस घटना ने राजनीति में भी हलचल मचा दी है।
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पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के आरामबाग में छह बुजुर्ग नागरिकों ने राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की गुहार लगाई है। ये लोग एसआईआर (SIR) की लिस्ट से नाम कटने के बाद मानसिक तनाव में हैं। इनमें एक रिटायर्ड हेडमिस्ट्रेस और एक कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल शामिल हैं। इन लोगों ने अपने गले में अपनी पेंशन, आधार और पासपोर्ट के कागजात लटका रखे हैं, जिससे वे अपनी पहचान साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने प्रशासनिक जटिलताओं और नागरिकता के मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आरामबाग के बीजेपी जिलाध्यक्ष सुशांत बेरा ने इस मामले को चुनाव आयोग के अंतर्गत बताया है, जबकि पीड़ितों का कहना है कि उनके पास पुख्ता दस्तावेज होते हुए भी उनका नाम काटा गया है। यह स्थिति न केवल उनकी पहचान के लिए बल्कि मानवता के लिए भी शर्मनाक है।
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इस घटना ने नागरिकता और पहचान के मुद्दों पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे स्थानीय समुदाय में असुरक्षा की भावना बढ़ गई है।
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