भारत में एंटीबायोटिक प्रतिरोध: सीवेज से फैल रहा स्वास्थ्य संकट
एंटीबायोटिक भी हो रहीं बेअसर! नई रिसर्च का दावा- सीवेज से फैल रहा महामारी का खतरा
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
भारत में कोविड-19 के दौरान विकसित अपशिष्ट जल निगरानी तकनीक ने एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीन (AMR) के बढ़ते खतरे की पहचान की है। वैज्ञानिकों ने बताया कि शहरी सीवेज में AMR की उपस्थिति से गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है, जिससे हर साल 10 लाख से अधिक मौतें हो रही हैं।
- 01भारत में शहरी सीवेज में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीन की मौजूदगी का पता चला है।
- 02हर साल 10 लाख से अधिक लोग दवा-प्रतिरोधी बैक्टीरिया संक्रमण से मरते हैं।
- 03अस्पतालों का अपशिष्ट और घरेलू कचरा इस संकट को बढ़ा रहा है।
- 04दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से 447 नमूनों का विश्लेषण किया गया।
- 05आईसीएमआर और CCMB ने निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने की सिफारिश की है।
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नई दिल्ली में वैज्ञानिकों ने सीवेज में एंटीबायोटिक-प्रतिरोधी जीन (AMR) की मौजूदगी का पता लगाया है, जो भारत में एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का संकेत है। कोविड-19 महामारी के बाद, यह समस्या बढ़ती जा रही है, जिससे अनुमानित 10 लाख से अधिक लोगों की हर साल मौत होती है। अस्पतालों का अपशिष्ट जल और घरेलू कचरा इस संकट को और गंभीर बना रहा है। अध्ययन में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई से 447 नमूनों का विश्लेषण किया गया, जिसमें बैक्टीरिया के जीन के आदान-प्रदान की गतिविधियों का पता चला। दिल्ली में ई. कोलाई वेरिएंट और चेन्नई में क्लेबसिएला प्रजातियां प्रमुख पाई गईं। इस बढ़ते खतरे से निपटने के लिए आईसीएमआर और सीसीMB ने निगरानी नेटवर्क को मजबूत करने और जल स्रोतों की सुरक्षा के लिए नई तकनीकों के उपयोग की सिफारिश की है।
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यह स्वास्थ्य संकट आम लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है, क्योंकि एंटीबायोटिक्स का प्रभाव कम हो रहा है।
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