पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती, खजाने को भारी नुकसान
पश्चिम एशिया संकट के बीच डीजल-पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी घटी, पर खजाने को ₹5,500 करोड़ की चपत
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पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती की है, जिससे खजाने को ₹5,500 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है। इसके साथ ही, 40 पेट्रोलियम उत्पादों को सीमा शुल्क से छूट दी गई है, जिससे राजस्व पर और असर पड़ेगा।
- 01सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में कटौती की है।
- 02खजाने को ₹5,500 करोड़ का नुकसान होने का अनुमान है।
- 0340 पेट्रोलियम उत्पादों को सीमा शुल्क से छूट दी गई है।
- 04यदि छूट जारी रही, तो वित्त वर्ष 2026-27 में कुल नुकसान ₹1.32 लाख करोड़ हो सकता है।
- 05पेट्रोलियम पर उत्पाद शुल्क का योगदान कुल संग्रह का लगभग 90% है।
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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण भारत सरकार ने डीजल और पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में कटौती करने का निर्णय लिया है। यह कटौती 15 दिनों के लिए लागू होगी और इसके साथ ही 40 पेट्रोलियम उत्पादों को सीमा शुल्क से छूट दी गई है। अधिकारियों के अनुसार, इस कदम से सरकारी खजाने को लगभग ₹5,500 करोड़ का नुकसान हो सकता है। उत्पाद शुल्क में कटौती से 7,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है, जबकि निर्यात शुल्क लगाने से 1,500 करोड़ रुपये का लाभ होगा। यदि यह छूट पूरे वित्त वर्ष 2026-27 में जारी रही, तो खजाने को शुद्ध ₹1.32 लाख करोड़ का नुकसान हो सकता है। यह राशि 3.9 लाख करोड़ रुपये के उत्पाद शुल्क संग्रह के बजट अनुमान का लगभग एक-तिहाई है।
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इस निर्णय से ईंधन की कीमतों में कमी हो सकती है, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलेगी। हालांकि, सरकार के राजस्व में कमी से अन्य विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है।
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