बेरोजगारी के कारण माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर बढ़ता खतरा
बड़े बच्चे की नौकरी जाने से माता-पिता हो रहे प्रभावित, बढ़ रहा डिप्रेशन का खतरा
Aaj Tak
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भारत में बेरोजगारी का प्रभाव केवल व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके माता-पिता के मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रहा है। एक अध्ययन के अनुसार, जब बड़े बच्चे बेरोजगार होते हैं, तो माता-पिता में डिप्रेशन का खतरा लगभग 12 प्रतिशत बढ़ जाता है।
- 01बेरोजगारी का प्रभाव परिवारों में गहराई तक फैलता है।
- 02बुजुर्गों में डिप्रेशन का खतरा बढ़ता है जब उनके बड़े बच्चे बेरोजगार होते हैं।
- 03सामाजिक संपर्क रखने वाले बुजुर्गों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं।
- 04पहले जन्मे बच्चे की बेरोजगारी का माता-पिता पर सबसे अधिक प्रभाव होता है।
- 05अकेले रहने वाले बुजुर्गों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़ती हैं।
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भारत में बेरोजगारी की समस्या केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं, बल्कि परिवारों में भी गहराई से असर डाल रही है। एक नए अध्ययन के अनुसार, जब बड़े बच्चे बेरोजगार होते हैं, तो उनके माता-पिता में डिप्रेशन का खतरा लगभग 12 प्रतिशत बढ़ जाता है। यह अध्ययन 73,000 से अधिक बुजुर्गों पर आधारित है और दर्शाता है कि परिवारों में माता-पिता अपने बच्चों की नौकरी और आर्थिक स्थिति को अपनी सफलता से जोड़ते हैं। जब बच्चे बेरोजगार होते हैं, तो यह माता-पिता के लिए एक भावनात्मक दबाव बन जाता है। अध्ययन में यह भी पाया गया है कि पहले जन्मे बच्चे की बेरोजगारी का माता-पिता पर सबसे अधिक प्रभाव होता है। इसके अलावा, जो बुजुर्ग सामाजिक रूप से सक्रिय रहते हैं, उनमें मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं कम होती हैं, जबकि अकेले रहने वालों में यह खतरा बढ़ जाता है।
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बेरोजगारी के कारण माता-पिता की मानसिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिससे परिवारों में तनाव और अवसाद बढ़ता है।
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