महिला आरक्षण पर संसद में उठेगा तूफान, विपक्ष का विरोध जारी
महिला आरक्षण पर महाभारत! परिसीमन पर क्यों मचा है तूफान, संसद में विपक्ष को क्या मना पाएगी सरकार
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संसद का सत्र आज से शुरू हो रहा है, जिसमें महिला आरक्षण से संबंधित तीन बिलों को पारित करने का एजेंडा है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सरकार परिसीमन के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है, जिससे दक्षिण भारत के राज्यों को नुकसान हो सकता है।
- 01महिला आरक्षण के लिए तीन बिलों को पारित करने का एजेंडा
- 02विपक्ष का आरोप: परिसीमन के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना
- 032011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा विवादित
- 04संविधान संशोधन बिल के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता
- 05सरकार विपक्ष को आश्वस्त करने के लिए बड़े आश्वासन दे सकती है
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संसद का सत्र आज से शुरू हो रहा है और इसका मुख्य एजेंडा महिला आरक्षण से संबंधित तीन बिलों को पारित करना है। विपक्ष ने इन बिलों का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन के जरिए सीटों की संख्या बढ़ाने की योजना बना रही है। इसमें लोकसभा की सीटों की संख्या को 850 करने का प्रावधान शामिल है, जो कि विवाद का कारण बना है। विपक्ष का कहना है कि 2011 की जनगणना के आधार पर सीटों का बंटवारा किया गया तो दक्षिण भारत के राज्यों जैसे तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक को नुकसान होगा। संविधान संशोधन बिल को पारित करने के लिए दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता है, जबकि सरकार के पास संख्या बल की कमी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार विपक्ष को आश्वस्त करने के लिए कुछ बड़े आश्वासन दे सकती है, जैसे कि सीटों की संख्या आनुपातिक रूप से बढ़ाई जाएगी।
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यदि बिल पारित होता है, तो यह महिला प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा, लेकिन कुछ राज्यों को सीटों की संख्या में कमी का सामना करना पड़ सकता है।
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