मुख्यमंत्रियों की चुनावी लड़ाई: ममता, हिमंता, विजयन और स्टालिन की चुनौतियाँ
ममता, हिमंता, विजयन और स्टालिन सबकी लड़ाइयां अलग, लेकिन चुनौती एक
Aaj Tak
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पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में चार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, हिमंता बिस्वा सरमा, पिनाराई विजयन और एमके स्टालिन अपनी-अपनी सत्ता की लड़ाई लड़ रहे हैं। सभी को सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है, जो उनके चुनावी भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
- 01ममता बनर्जी चौथी बार चुनाव जीतने की कोशिश में हैं, लेकिन चुनौतियाँ बढ़ गई हैं।
- 02हिमंता बिस्वा सरमा असम में बीजेपी का चेहरा हैं और उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है।
- 03पिनाराई विजयन के लिए यह चुनाव लेफ्ट का भविष्य तय करेगा, हैट्रिक की चुनौती है।
- 04एमके स्टालिन को पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और थलपति विजय से चुनौती मिल रही है।
- 05चार राज्यों के चुनाव परिणाम बीजेपी और विपक्ष की राजनीति पर गहरा असर डालेंगे।
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पश्चिम बंगाल, असम, केरल और तमिलनाडु में आगामी विधानसभा चुनावों में चार मुख्यमंत्री अपनी-अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल) चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन उन्हें सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ रहा है। पिछले चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था, और इस बार उनकी जीत उनके राजनीतिक भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। हिमंता बिस्वा सरमा (असम) बीजेपी का प्रमुख चेहरा हैं और उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही है। पिनाराई विजयन (केरल) के लिए यह चुनाव लेफ्ट का भविष्य तय करेगा, क्योंकि उन्हें हैट्रिक की चुनौती का सामना करना है। एमके स्टालिन (तमिलनाडु) को पूर्व मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और अभिनेता थलपति विजय से चुनौती मिल रही है, जो चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं। चार राज्यों के चुनाव परिणाम बीजेपी और विपक्ष की राजनीति पर गहरा असर डालेंगे।
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इन चुनावों के परिणाम न केवल चार राज्यों की राजनीतिक दिशा तय करेंगे, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष और बीजेपी की ताकत को भी प्रभावित करेंगे।
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