झारखंड में बालू घाटों की नीलामी में देरी से करोड़ों का नुकसान
झारखंड: टेंडर प्रक्रिया में फंसी बालू घाटों की नीलामी, सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान
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झारखंड में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में देरी से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। रांची में प्रतिदिन 20,000 टन बालू की खपत हो रही है, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में अड़चन के कारण बालू का उठाव नहीं हो पा रहा है।
- 01रांची में प्रतिदिन 20,000 टन बालू की खपत हो रही है।
- 02राज्य के 444 घाटों में से 298 घाटों पर नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।
- 03बालू घाटों का संचालन एजेंसियों को नहीं सौंपा गया है।
- 04ग्राम सभा का नियंत्रण केवल 5 हेक्टेयर से कम के घाटों पर है।
- 05टेंडर प्रक्रिया पूरी होते ही बालू का उठाव शुरू होगा।
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झारखंड में बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में देरी के कारण राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है। रांची में प्रतिदिन 500 हाइवा बालू की खपत हो रही है, जो लगभग 20,000 टन है। हालांकि, पिछले आठ महीनों से बालू घाटों की नीलामी प्रक्रिया में अड़चनें आई हैं। राज्य के 444 घाटों में से 298 घाटों पर नीलामी प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है, जिससे बालू का उठाव प्रभावित हुआ है। खान निदेशालय ने उपायुक्तों को निर्देश दिए हैं कि वे टेंडर प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करें। ग्राम सभा का अधिकार केवल 5 हेक्टेयर से कम के घाटों पर होता है, जिनका उपयोग स्थानीय स्तर पर किया जा सकता है। जैसे ही टेंडर प्रक्रिया पूरी होगी, बालू का उठाव शुरू किया जाएगा।
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बालू की नीलामी प्रक्रिया में देरी से स्थानीय निर्माण कार्य और विकास परियोजनाएं प्रभावित हो रही हैं।
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