बंगाल में मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए गए, टीएमसी का दावा: 63 प्रतिशत हिंदू
'SIR में 63 प्रतिशत हिंदू नाम हटे', टीएमसी के दावों पर भाजपा ने उठाए सवाल
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बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए गए हैं, जिनमें से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दावा है कि 63 प्रतिशत हिंदू हैं। भाजपा ने इस पर सवाल उठाते हुए आंकड़ों की सत्यता पर संदेह जताया है। इस मुद्दे का आगामी चुनावों पर असर पड़ सकता है।
- 01बंगाल में मतदाता सूची से 91 लाख नाम हटाए गए हैं।
- 02तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि हटाए गए नामों में से 63 प्रतिशत हिंदू हैं।
- 03भाजपा ने टीएमसी के आंकड़ों की सत्यता पर सवाल उठाए हैं।
- 04मतुआ बहुल क्षेत्रों में हिंदू नामों के हटने से भाजपा के वोट बैंक पर असर पड़ सकता है।
- 05एक बुजुर्ग की मौत को एसआइआर की दहशत और प्रशासनिक कुप्रबंधन से जोड़ा गया है।
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बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत 91 लाख नाम हटाए गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने दावा किया है कि इनमें से 63 प्रतिशत नाम हिंदू हैं, जिससे भाजपा के लिए असहज स्थिति उत्पन्न हो गई है। टीएमसी के प्रवक्ता अरूप चक्रवर्ती ने कहा कि भाजपा ने घुसपैठियों को खोजने के नाम पर गरीब हिंदुओं को प्रताड़ित किया है। भाजपा प्रवक्ता राजर्षि लाहिड़ी ने टीएमसी के आंकड़ों की सत्यता पर सवाल उठाया और पूछा कि यह गोपनीय डेटा टीएमसी के पास कैसे आया। जानकारों का मानना है कि मतुआ बहुल क्षेत्रों में हिंदू नामों के हटने से भाजपा के वोट बैंक पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस बीच, नदिया जिले में एक बुजुर्ग की मौत का आरोप एसआइआर की दहशत और प्रशासनिक कुप्रबंधन पर लगाया गया है।
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हिंदू नामों के हटने से भाजपा के वोट बैंक पर नकारात्मक असर पड़ सकता है, जो आगामी चुनावों में महत्वपूर्ण हो सकता है।
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