सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनहित याचिकाएं खारिज की, कहा पहले प्रशासनिक प्राधिकरण से संपर्क करें
'हर मुद्दे पर सीधे कोर्ट न आएं',और सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दीं 25 अर्जियां, क्या है मामला?
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सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित प्रशासनिक प्राधिकरण से संपर्क करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका अंतिम विकल्प है और अधिकारियों को मुद्दों पर जागरूक होना चाहिए।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने 25 जनहित याचिकाएं खारिज कीं।
- 02याचिकाकर्ताओं को पहले प्रशासनिक प्राधिकरण से संपर्क करने की सलाह दी गई।
- 03कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका अंतिम विकल्प है।
- 04याचिकाओं में समान भाषा नीति और फूड रजिस्ट्रेशन जैसे मुद्दे शामिल थे।
- 05जाति जनगणना पर रोक लगाने की याचिका भी खारिज की गई।
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एक ही सुनवाई में 25 जनहित याचिकाओं का निपटारा किया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित प्रशासनिक और वैधानिक प्राधिकरण के पास जाना चाहिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका हर नीति से जुड़े मामले में अंतिम विकल्प है। याचिकाओं में समान भाषा नीति, साबुन के केमिकल के नियम, और देशभर में फूड रजिस्ट्रेशन अभियान जैसी मांगें शामिल थीं। एक अन्य याचिका में भिखारियों और ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान के लिए नीति बनाने का अनुरोध किया गया था। इसके अलावा, जाति जनगणना पर रोक लगाने की याचिका भी खारिज की गई, जिसमें कोर्ट ने याचिकाकर्ता की भाषा पर गंभीर आपत्ति जताई।
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इस निर्णय से आम नागरिकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि न्यायपालिका का उपयोग कब करना चाहिए।
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