प्री-पेड बिजली मीटर: विकल्प या बाध्यता? संसद में उठा सवाल
ऊर्जा मंत्री ने कहा- प्री-पेड बिजली मीटर विकल्प है-बाध्यता नहीं, संसद में हनुमान बेनीवाल ने पूछा 'फिर थोपा क्यों जा रहा'
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भारत में प्री-पेड बिजली मीटर की स्थापना पर बहस जारी है। सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार से पूछा कि क्या बिना उपभोक्ताओं की सहमति के इसे लागू करना उचित है। ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने इसे विकल्प बताया, लेकिन विपक्ष ने इसे थोपने का आरोप लगाया है।
- 01प्री-पेड मीटर उपभोक्ताओं के लिए एक विकल्प है, बाध्यता नहीं।
- 02सरकार ने 6.13 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए हैं, जिनमें से 2.25 करोड़ प्री-पेड हैं।
- 03उपभोक्ताओं की सहमति के बिना प्री-पेड मीटर लगाने पर सवाल उठाए गए हैं।
- 04सरकार का दावा है कि प्री-पेड मीटर उपभोक्ताओं और बिजली कंपनियों दोनों के लिए फायदेमंद हैं।
- 05नए कनेक्शन सिर्फ स्मार्ट प्री-पेड मीटर से दिए जा रहे हैं।
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भारत में प्री-पेड बिजली मीटर की स्थापना को लेकर संसद में चर्चा हुई। सांसद हनुमान बेनीवाल ने पूछा कि क्या बिना उपभोक्ताओं की सहमति के प्री-पेड मीटर लागू करना विद्युत अधिनियम, 2003 के खिलाफ नहीं है। ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल ने स्पष्ट किया कि प्री-पेड मीटर एक विकल्प है और इसे थोपने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने बताया कि देश में अब तक 6.13 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए गए हैं, जिनमें से 2.25 करोड़ प्री-पेड मोड में हैं। सरकार का कहना है कि प्री-पेड मीटर उपभोक्ताओं को रियल-टाइम बिजली खपत पर नजर रखने की सुविधा प्रदान करते हैं और इससे गलत बिलिंग की समस्या भी समाप्त होगी। हालांकि, विपक्ष और विभिन्न उपभोक्ता संगठनों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं। नए बिजली कनेक्शन केवल स्मार्ट प्री-पेड मीटर से दिए जा रहे हैं, और यदि किसी राज्य को अलग व्यवस्था करनी है, तो उसे राज्य विद्युत नियामक आयोग से मंजूरी लेनी होगी।
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प्री-पेड मीटर के विकल्प से उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत पर अधिक नियंत्रण मिलेगा, जिससे वे अपनी जरूरत के अनुसार रिचार्ज कर सकेंगे।
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