जल संकट और लैंगिक समानता: भारत की पहल
विचार: लैंगिक समानता को बल देने वाली पहल
Jagran
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विश्व जल दिवस पर, जल संकट और लैंगिक असमानता पर ध्यान केंद्रित किया गया। भारत ने जल जीवन मिशन के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में नल से पानी पहुंचाने का प्रयास किया है, जिससे महिलाओं को पानी लाने के श्रम से मुक्ति मिली है और उनके आर्थिक सशक्तीकरण में सहायता मिली है।
- 01जल संकट का प्रभाव मुख्यतः महिलाओं और लड़कियों पर पड़ता है।
- 02भारत का जल जीवन मिशन 2019 में शुरू हुआ, जिसका लक्ष्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है।
- 03लगभग 15.82 करोड़ ग्रामीण परिवारों को जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है।
- 04जल जीवन मिशन ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
- 05महिलाओं की भागीदारी को जल प्रबंधन में अनिवार्य किया गया है।
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गर्मियों के आगमन के साथ जल संकट की चुनौतियां बढ़ रही हैं। विश्व जल दिवस पर, यह स्पष्ट हुआ कि जल संकट केवल संसाधनों का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह लैंगिक समानता से भी जुड़ा हुआ है। फिजी के एक गांव की कहानी से यह जाहिर होता है कि लगभग 1.8 अरब लोग सुरक्षित पेयजल से वंचित हैं, और पानी लाने की जिम्मेदारी अक्सर महिलाओं और लड़कियों पर होती है। भारत ने जल जीवन मिशन के माध्यम से इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया है, जिसमें 2019 से ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इस मिशन के तहत, मार्च 2026 तक लगभग 15.82 करोड़ ग्रामीण परिवारों को जल कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है, जिससे महिलाओं को पानी लाने के श्रम से मुक्ति मिली है। यह न केवल महिलाओं के समय और ऊर्जा को पुनर्संयोजित करता है, बल्कि उनके आर्थिक सशक्तीकरण में भी मदद करता है। जल प्रबंधन में महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य कर, भारत ने एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत किया है, लेकिन इस दिशा में अभी और प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
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जल जीवन मिशन से महिलाओं को पानी लाने के श्रम से मुक्ति मिली है, जिससे वे शिक्षा और आर्थिक गतिविधियों में अधिक समय दे पा रही हैं।
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