कोलकाता में मतदाता सूची में लाखों नाम कटने से चुनावी समीकरण में बदलाव
कोलकाता की 11 सीटों पर एसआईआर में कटे लाखों नाम, बदलेगा चुनावी गणित
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में लाखों नाम हटाए गए हैं। इसमें मुख्य रूप से मुस्लिम, महिला और गरीब वर्ग के मतदाता शामिल हैं, जो तृणमूल कांग्रेस का कोर वोट बैंक माने जाते हैं। इस बदलाव से चुनावी परिणामों पर गहरा असर पड़ सकता है।
- 01कोलकाता की 11 विधानसभा सीटों से लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
- 02हटाए गए मतदाताओं में अधिकांश मुस्लिम, महिला और गरीब वर्ग के लोग हैं।
- 03भवानीपुर सीट पर लगभग 47 हजार मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
- 04विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- 05चौरंगी सीट पर 80 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल में 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) के तहत लाखों मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इस प्रक्रिया में कोलकाता की सभी 11 विधानसभा सीटों से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम, महिला और गरीब वर्ग से संबंधित हैं। यह तृणमूल कांग्रेस के लिए एक गंभीर चुनौती बन सकता है, क्योंकि ये वर्ग पार्टी का कोर वोट बैंक माने जाते हैं। उदाहरण के लिए, भवानीपुर सीट पर लगभग 47,000 मतदाता सूची से हटाए गए हैं, जबकि 2024 में यहां पार्टी की बढ़त केवल 8,297 वोटों की थी। इसके अलावा, चौरंगी सीट से 80,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति भाजपा के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है, क्योंकि कुछ सीटों पर हिंदी भाषी हिंदू मतदाताओं के नाम भी हटाए गए हैं। इस प्रकार, यह बदलाव चुनावी परिणामों को प्रभावित कर सकता है।
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मतदाता सूची से लाखों नाम हटने से तृणमूल कांग्रेस की चुनावी स्थिति कमजोर हो सकती है, जो उनके कोर वोट बैंक को प्रभावित कर सकती है।
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