अमेरिका-ईरान संघर्षविराम: ट्रंप की धमकियों का असर
अमेरिका-ईरान के बीच सीजफायर, क्या गोलियों के साथ ट्रंप की गालियां भी रहीं कारगर?
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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम 90 मिनट पहले घोषित किया गया, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर चेतावनी दी। पाकिस्तान के मध्यस्थता से यह समझौता हुआ, जिससे दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावना बढ़ी।
- 01अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम 90 मिनट पहले घोषित हुआ।
- 02डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को गंभीर चेतावनी दी थी।
- 03पाकिस्तान ने मध्यस्थता की और 14 दिन के संघर्षविराम पर सहमति बनी।
- 04ईरान ने अमेरिका की धमकियों के बावजूद अपने हमलों को जारी रखा।
- 05संघर्षविराम के बाद बातचीत की संभावना बढ़ी है।
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अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की घोषणा डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के 90 मिनट बाद हुई। ट्रंप ने ईरान को धमकी दी थी कि यदि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य को नहीं खोला, तो अमेरिका उसकी सभ्यता को नष्ट कर देगा। इस बीच, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मध्यस्थता की और दोनों देशों के बीच 14 दिन के संघर्षविराम पर सहमति बनी। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी इस समझौते को मान लिया है। हालांकि, ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमले किए थे, जिससे स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई। ईरान ने अपने हमलों को जारी रखा और अमेरिका के सहयोगी देशों पर भी हमले किए। अब देखना होगा कि क्या दोनों देश बातचीत की मेज पर आकर संघर्षविराम की शर्तों पर सहमत हो पाते हैं।
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संघर्षविराम से मध्य पूर्व में स्थिरता की उम्मीद बढ़ी है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
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