पश्चिम बंगाल में आपराधिक मामलों के आरोपी नेताओं की सुरक्षा हटाने का चुनाव आयोग का आदेश
क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले नेताओं का सुरक्षा 'घेरा' हटेगा, बंगाल में वोटिंग से पहले चुनाव आयोग ने चलाया चाबुक
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चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि आपराधिक मामलों के आरोपी नेताओं की सुरक्षा तुरंत हटाई जाए। यह कदम मालदा जिले में जजों को बंधक बनाने की घटना के बाद उठाया गया है, जहां नेताओं का सुरक्षा का दुरुपयोग हो रहा था।
- 01चुनाव आयोग ने आपराधिक मामलों के आरोपी नेताओं की सुरक्षा हटाने का आदेश दिया।
- 02मालदा में जजों को बंधक बनाने की घटना ने इस निर्णय को प्रेरित किया।
- 03बंगाल में 291 विधायकों में से 136 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं।
- 04सुरक्षा हटाने का आदेश सभी राजनीतिक दलों के नेताओं पर लागू होगा।
- 05ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप है कि वह सरकारी पैसे पर 976 नेताओं को सुरक्षा मुहैया करा रही थी।
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चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे आपराधिक मामलों के आरोपी नेताओं की सुरक्षा तुरंत हटा दें। यह निर्णय मालदा जिले में जजों को बंधक बनाने की घटना के बाद लिया गया, जहां आरोप है कि नेताओं ने सरकारी सुरक्षा का दुरुपयोग किया। आयोग ने कहा कि सभी दलों के नेताओं, चाहे वे जमानत पर हों या पैरोल पर, की सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) की रिपोर्ट के अनुसार, 291 मौजूदा विधायकों में से 136 यानी 47% के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से 37% विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। ममता बनर्जी की सरकार पर आरोप है कि वह सरकारी पैसे पर 976 नेताओं को सुरक्षा मुहैया करा रही थी, जिनमें से 832 तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे। आयोग का यह आदेश सुरक्षा के दुरुपयोग को रोकने के लिए महत्वपूर्ण कदम है।
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इस आदेश से आपराधिक छवि वाले नेताओं की सुरक्षा हटने से आम लोगों की सुरक्षा में सुधार हो सकता है।
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