श्राउड ऑफ ट्यूरिन: भारत से जुड़े जीसस के कफन का डीएनए रहस्य
श्राउड ऑफ ट्यूरिन: क्या भारत में बना था जीसस का कफन? डीएनए टेस्ट में खुल गया सदियों पुराना राज
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श्राउड ऑफ ट्यूरिन, जो जीसस क्राइस्ट के शव को लपेटे जाने का दावा करता है, पर हालिया डीएनए टेस्ट से पता चला है कि इसमें लगभग 40% भारतीय मूल के डीएनए शामिल हैं। यह शोध इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ पाडोवा द्वारा किया गया है और यह सुझाव देता है कि यह कपड़ा प्राचीन सिंधु घाटी में बना हो सकता है।
- 01श्राउड ऑफ ट्यूरिन पर 40% भारतीय मूल के डीएनए का पता चला है।
- 02यह कपड़ा संभवतः प्राचीन सिंधु घाटी में बना हो सकता है।
- 03कपड़े पर इंसानों, जानवरों और पौधों के डीएनए के निशान पाए गए हैं।
- 04कफन का इतिहास 1354 से शुरू होता है, जब इसे पहली बार फ्रांस में देखा गया।
- 05यह कपड़ा आज भी लाखों लोगों द्वारा जीसस की मौजूदगी का प्रमाण माना जाता है।
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श्राउड ऑफ ट्यूरिन, जो जीसस क्राइस्ट के शव को लपेटने का दावा करता है, पर हाल ही में इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ पाडोवा के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए डीएनए परीक्षण ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस कपड़े पर मिले अवशेषों में 40% भारतीय मूल के वंशजों का डीएनए पाया गया है। यह शोध बताता है कि कपड़ा या इसका धागा प्राचीन सिंधु घाटी के आसपास के क्षेत्रों में बना हो सकता है, जिसे बाद में रोमन व्यापारियों द्वारा यूरोप लाया गया। कपड़े पर इंसानों, जानवरों और पौधों के डीएनए के निशान भी मिले हैं, जिसमें पालतू बिल्ली, कुत्ते, घोड़े और मुर्गियों का डीएनए शामिल है। इस कफन का इतिहास 1354 में फ्रांस में शुरू होता है और यह 16वीं सदी से इटली के ट्यूरिन शहर के सेंट जॉन द बैपटिस्ट कैथेड्रल में रखा गया है। इस कपड़े को लेकर बाइबिल में भी कई उल्लेख हैं, लेकिन वैज्ञानिक इसे व्यापारिक रिश्तों के माध्यम से समझने की कोशिश कर रहे हैं। आज भी लाखों लोग इस कपड़े को जीसस की मौजूदगी का सबसे बड़ा प्रमाण मानते हैं।
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