साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक से OTP धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
OTP चुराने वालों का खेल खत्म, आ रही ‘साइलेंट ऑथेंटिकेशन’ तकनीक जिससे बैंक करेंगे आपकी पहचान
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
बैंक और टेलिकॉम कंपनियां 'साइलेंट ऑथेंटिकेशन' तकनीक विकसित कर रही हैं, जो ग्राहकों की पहचान को सुरक्षित करेगी। यह तकनीक ओटीपी चुराने के प्रयासों को विफल कर देगी और बैंकिंग लेनदेन को सुरक्षित बनाएगी।
- 01साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक से ओटीपी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी।
- 02यह तकनीक मोबाइल नंबर की पहचान की पुष्टि करेगी।
- 03सिम क्लोनिंग और eSIM स्वैपिंग के प्रयासों को विफल करेगी।
- 04SMS आधारित ओटीपी के बजाय ऐप आधारित ओटीपी का उपयोग किया जाएगा।
- 05बैंकों ने 1 अप्रैल से नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं।
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साइलेंट ऑथेंटिकेशन तकनीक, जो बैंक और टेलिकॉम कंपनियों द्वारा विकसित की जा रही है, ओटीपी चुराने के प्रयासों को समाप्त करने में मदद करेगी। यह तकनीक ग्राहकों की पहचान की पुष्टि करने के लिए मोबाइल नंबर की सक्रियता की जांच करेगी। यदि किसी उपयोगकर्ता का सिम कार्ड सक्रिय नहीं है, तो बैंकिंग लेनदेन को रोका जा सकेगा। इसके अलावा, टेलिकॉम कंपनियां SMS आधारित ओटीपी के स्थान पर अपने ऐप्स के माध्यम से ओटीपी भेजने पर विचार कर रही हैं, जिससे धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी। बैंकों ने 1 अप्रैल से 'टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन' (2FA) नियमों के तहत आधार पर आधारित फेस ऑथेंटिकेशन और इन-ऐप ओटीपी जनरेशन शुरू कर दिया है।
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इस तकनीक के लागू होने से ग्राहकों की बैंकिंग लेनदेन की सुरक्षा बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी।
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