भारत में खर्राटों की समस्या: 40% पुरुष प्रभावित, जानें स्वास्थ्य पर प्रभाव
भारत में 40% पुरुषों में खर्राटे की समस्या, बच्चे भी चपेट में; KGMU के एक्सपर्ट ने बताया हार्ट अटैक का बड़ा कनेक्शन
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भारत में लगभग 40% पुरुष खर्राटे लेते हैं, जबकि 20% महिलाएं और 10% बच्चे भी इस समस्या से ग्रसित हैं। केजीएमयू के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि खर्राटे हार्ट अटैक और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
- 0140% पुरुषों में खर्राटे की समस्या है।
- 0210 करोड़ लोग भारत में ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से प्रभावित हैं।
- 03खर्राटे से अनिद्रा और सड़क हादसों का खतरा बढ़ता है।
- 04मोटापा और जीवनशैली खर्राटों के मुख्य कारण हैं।
- 05केजीएमयू में पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित होगा।
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भारत में नींद से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिनमें खर्राटे एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुके हैं। केजीएमयू के रेस्पिरेटरी मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष प्रो. सूर्यकांत के अनुसार, लगभग 40% पुरुष, 20% महिलाएं, और 10% बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं। खर्राटे की समस्या मुख्य रूप से गले की संरचना, हार्मोनल अंतर और जीवनशैली से जुड़ी आदतों के कारण होती है। भारत में 10 करोड़ लोग ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एप्निया से ग्रसित हैं। खर्राटे के कारण लोग अनिद्रा का शिकार हो जाते हैं, जिससे दिन में सोने की आदत पड़ जाती है और सड़क पर हादसे भी होते हैं। मोटापा, गर्दन के आसपास अतिरिक्त चर्बी, धूम्रपान, और शराब का सेवन जैसे कारक इस समस्या को बढ़ाते हैं। इसके अलावा, केजीएमयू में देश का पहला पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा, जिससे डॉक्टरों को आधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से रोगों की शीघ्र पहचान और उपचार में मदद मिलेगी।
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खर्राटों की समस्या से प्रभावित लोग अनिद्रा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जो उनकी दैनिक जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है।
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