कैंसर को नोटिफाएबल बनाने की मांग, तेलंगाना का कदम राष्ट्रीय नीति के लिए दबाव बढ़ाता है
देश में कैंसर को नोटिफाएबल बनाने की मांग, तेलंगाना के कदम से राष्ट्रीय नीति के लिए बढ़ा दबाव
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भारत में कैंसर के बढ़ते मामलों के कारण इसे राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित रोग घोषित करने की मांग तेज हो गई है। तेलंगाना ने कैंसर को नोटिफाएबल घोषित किया है, जिससे अन्य राज्यों पर भी प्रभाव पड़ेगा और राष्ट्रीय नीति बनाने की दिशा में कदम बढ़ेगा।
- 01तेलंगाना ने कैंसर को नोटिफाएबल घोषित किया है, जिससे रिपोर्टिंग अनिवार्य हो गई है।
- 02हर साल भारत में 14 लाख नए कैंसर मामले और 9 लाख से अधिक मौतें होती हैं।
- 03राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री प्रोग्राम (एनसीआरपी) की सीमित कवरेज से समस्या की पूरी तस्वीर नहीं मिलती।
- 04दिल्ली में भी इस व्यवस्था को लागू करने की मांग उठ रही है।
- 05कैंसर की रोकथाम और उपचार के लिए सटीक आंकड़े और संसाधनों का बेहतर वितरण संभव होगा।
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भारत में कैंसर के मामलों में वृद्धि और मृत्यु दर में बढ़ोतरी के कारण इसे राष्ट्रीय स्तर पर अधिसूचित रोग (नोटिफाएबल) बनाने की मांग तेज हो गई है। तेलंगाना सरकार ने 8 अप्रैल 2023 को कैंसर को नोटिफाएबल घोषित किया, जिसके तहत सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य संस्थानों को कैंसर के मामलों की रिपोर्ट एक महीने के भीतर देना अनिवार्य होगा। यह कदम भारत में कैंसर के बढ़ते संकट को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, जहां हर साल 14 लाख नए कैंसर मामले सामने आते हैं और 9 लाख से अधिक मौतें होती हैं। तेलंगाना के इस कदम ने अन्य राज्यों में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग को बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कैंसर की रोकथाम, प्रारंभिक पहचान और उपचार की योजना में सुधार होगा। हालांकि, इस प्रक्रिया में निजी क्षेत्र की भागीदारी और डाटा गोपनीयता बनाए रखना बड़ी चुनौतियां हैं।
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कैंसर को नोटिफाएबल बनाने से स्वास्थ्य प्रणाली में सुधार होगा, जिससे रोगियों को बेहतर उपचार मिल सकेगा।
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