उत्तर प्रदेश में नए व्यापार लाइसेंस शुल्क लागू, होटल और सराफा पर भारी असर
व्यापारियों को झटका: नया ट्रेड लाइसेंस शुल्क लागू, सराफा पर 50 हजार रुपये; होटल- रेस्तरां वालों के लिए मुसीबत
Amar Ujala
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उत्तर प्रदेश में नगर निगम अधिनियम-1959 के तहत नए व्यापार लाइसेंस शुल्क लागू किए गए हैं, जिससे होटल, रेस्तरां और सराफा व्यवसायों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है। यह निर्णय 16 दिसंबर, 1997 को पारित प्रस्ताव के अनुपालन में लिया गया है।
- 01नए व्यापार लाइसेंस शुल्क सभी छोटे-बड़े प्रतिष्ठानों के लिए अनिवार्य हैं।
- 02होटल और रेस्तरां पर शुल्क कमरे की संख्या के आधार पर निर्धारित किया गया है।
- 03सराफा व्यवसायों के लिए टर्नओवर के आधार पर शुल्क बढ़ाए गए हैं।
- 04अस्पताल और क्लीनिक भी नए शुल्क संरचना में शामिल हैं।
- 05यह निर्णय 1997 में पारित प्रस्ताव के अनुसार लिया गया है।
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उत्तर प्रदेश में नगर निगम अधिनियम-1959 के तहत नए व्यापार लाइसेंस शुल्क लागू किए गए हैं, जो सभी छोटे और बड़े प्रतिष्ठानों, होटलों, अस्पतालों और शोरूम के लिए अनिवार्य होंगे। नगर निगम प्रशासन के अनुसार, यह निर्णय 16 दिसंबर, 1997 को सदन में पारित प्रस्ताव और शासन के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है। नए शुल्क संरचना के तहत, होटल और रेस्तरां पर शुल्क कमरों की संख्या के आधार पर निर्धारित किया गया है। उदाहरण के लिए, 1 से 10 कमरों वाले होटल के लिए शुल्क 1,000 रुपये, जबकि 51 कमरों से ऊपर के लिए 9,000 रुपये होगा। सराफा व्यवसायों के लिए, टर्नओवर के आधार पर शुल्क बढ़ाए गए हैं, जिसमें 20 लाख रुपये से कम टर्नओवर पर 4,000 रुपये और 5 करोड़ रुपये से ऊपर पर 50,000 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, अस्पताल और क्लीनिकों के लिए भी शुल्क निर्धारित किए गए हैं, जैसे कि अस्पताल के लिए 5,000 रुपये। यह निर्णय व्यापारियों के लिए एक नई चुनौती पेश करता है।
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नए व्यापार लाइसेंस शुल्क से होटल, रेस्तरां और सराफा व्यवसायों पर वित्तीय बोझ बढ़ जाएगा, जिससे उनकी संचालन लागत में वृद्धि होगी।
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