स्टर्लिंग बायोटेक मामले में कोर्ट का आदेश, गूगल और मेटा को हटाने होंगे मानहानिकारक कंटेंट
स्टर्लिंग बायोटेक मामले में कोर्ट का बड़ा आदेश, गूगल और मेटा को 36 घंटे में मानहानिकारक कंटेंट हटाने का निर्देश
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दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले में गूगल और मेटा प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे में मानहानिकारक कंटेंट हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हो सकती है।
- 01अदालत ने गूगल और मेटा को 36 घंटे में मानहानिकारक कंटेंट हटाने का निर्देश दिया है।
- 02याचिकाकर्ता मनोज केसरीचंद संदेसरा ने मानहानिकारक सामग्री का विरोध किया था।
- 03अदालत ने कहा कि सामग्री का प्रसार व्यक्ति की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है।
- 04अदालत ने मीडिया को निष्पक्षता और संतुलन बनाए रखने की सलाह दी।
- 05अगली सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
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दिल्ली की तीस हजारी स्थित सिविल न्यायाधीश की अदालत ने स्टर्लिंग बायोटेक बैंक धोखाधड़ी मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने याचिकाकर्ता मनोज केसरीचंद संदेसरा की याचिका पर सुनवाई करते हुए गूगल एलएलसी और मेटा प्लेटफॉर्म्स को 36 घंटे के भीतर मानहानिकारक ऑनलाइन कंटेंट को हटाने और डि-इंडेक्स करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया गया, तो याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति हो सकती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि मुकदमे के लंबित रहने तक संदिग्ध सामग्री को दोबारा प्रकाशित या प्रसारित नहीं किया जाएगा। याचिकाकर्ता का कहना था कि उन्हें और उनके परिवार को इंटरनेट मीडिया पर धोखेबाज और धन शोधन करने वाला बताया गया है, जबकि कानूनी कार्यवाही में बदलाव हुए हैं। अदालत ने मीडिया की जिम्मेदारी पर भी टिप्पणी की और कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पूर्ण नहीं है। अगली सुनवाई 20 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
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यह आदेश इंटरनेट मीडिया पर मानहानिकारक सामग्री के प्रसार को नियंत्रित करने में मदद करेगा, जिससे याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा की रक्षा होगी।
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