अमेरिका की ईरान के खिलाफ सैन्य तैनाती और इस्लामाबाद में शांति वार्ता का संयोग
ट्रंप की ईरान पर नए हमले की तैयारी? इस्लामाबाद में बातचीत के साथ ही अमेरिका क्यों बढ़ा सैन्य जमावड़ा, समझें
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
अमेरिकी उपराष्ट्रपति इस्लामाबाद में ईरान के साथ शांति वार्ता कर रहे हैं, जबकि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है। ईरान ने अमेरिका पर भरोसा नहीं जताया है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य विकल्प को खुला रखा है। यह स्थिति दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा सकती है।
- 01अमेरिका ईरान के साथ शांति वार्ता कर रहा है, लेकिन सैन्य तैनाती भी बढ़ा रहा है।
- 02ईरान ने अमेरिका पर भरोसा नहीं जताया है।
- 03डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य विकल्प को खुला रखा है।
- 04अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50,000 के पार पहुंच गई है।
- 05यह स्थिति दोनों देशों के बीच तनाव को बढ़ा सकती है।
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति इस्लामाबाद में ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए मौजूद हैं, जबकि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को तेजी से बढ़ा रहा है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेनाएं क्षेत्र में तैनात हो रही हैं, जिसमें फाइटर जेट और हमलावर विमान शामिल हैं। अमेरिकी सेना की 28वीं एयरबोर्न डिवीजन के 1500 से 2000 सैनिकों को जल्द तैनात किया जाएगा। वर्तमान में, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की संख्या 50,000 के पार हो गई है, जो सामान्य स्तर 40,000 से अधिक है। हालांकि, ईरान के वार्ता दल ने अमेरिका पर भरोसा नहीं जताया है। ईरान के प्रतिनिधि मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि उनका अनुभव हमेशा नाकामी का रहा है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई का विकल्प खुला रखा है, जिससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका बातचीत के साथ-साथ सैन्य दबाव भी बना सकता है।
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इस स्थिति का असर मध्य पूर्व में सुरक्षा और स्थिरता पर पड़ सकता है, जिससे स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।
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