सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ पर केंद्र सरकार से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार को नोटिस, मुस्लिम पर्सनल लॉ के भेदभावपूर्ण प्रावधानों पर मांगा जवाब
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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में इन प्रावधानों को महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया गया है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मुस्लिम पर्सनल लॉ पर जवाब मांगा।
- 02याचिका में महिलाओं के खिलाफ भेदभाव का आरोप लगाया गया है।
- 03मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की।
- 04याचिका में शरीयत उत्तराधिकार नियमों की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा संबंधी आदेश भी दिए हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन एक्ट, 1937 के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि ये प्रावधान महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं, क्योंकि इन नियमों के तहत महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में कम हिस्सेदारी दी जाती है। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और अन्य न्यायाधीशों की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर गौर किया और केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय को नोटिस जारी किया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने एक न्यायिक अधिकारी को सुरक्षा प्रदान करने के लिए पुलिस को निर्देश भी दिए हैं। यह आदेश 2008 में अपहरण के मामले में दिए गए थे, जिसमें न्यायिक अधिकारी को धमकियों का सामना करना पड़ा था। कोर्ट ने दस्तावेजों के खराब अनुवाद पर भी चिंता जताई और उच्च न्यायालयों को चार सप्ताह में निर्णय लेने का निर्देश दिया।
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इस मामले का निपटारा महिलाओं के अधिकारों और समानता पर प्रभाव डालेगा।
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