सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय: पत्नी के भरण-पोषण का मानक गरिमापूर्ण जीवन होना चाहिए
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी का भरण-पोषण सम्मानजनक जीवन के अनुरूप होना चाहिए
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पति का पत्नी का भरण-पोषण केवल दिखावटी नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे गरिमापूर्ण जीवन के अनुरूप होना चाहिए। यह निर्णय एक मामले में पत्नी के भरण-पोषण को बढ़ाकर ₹25,000 प्रति माह करने के संदर्भ में आया है।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने भरण-पोषण को गरिमापूर्ण जीवन के अनुरूप रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 02पति का भरण-पोषण एक निरंतर कर्तव्य है।
- 03भरण-पोषण की राशि पति की वित्तीय स्थिति के अनुसार होनी चाहिए।
- 04पत्नी का भरण-पोषण ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 किया गया।
- 05यह मामला 7 मई, 2023 को हुए विवाह से संबंधित है।
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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा कि पति का पत्नी का भरण-पोषण केवल दिखावटी नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे पत्नी के गरिमापूर्ण जीवन के अनुरूप होना चाहिए। जस्टिस संजय करोल और आगस्टिन जार्ज मसीह की पीठ ने यह टिप्पणी एक मामले में की, जिसमें पत्नी के भरण-पोषण को प्रति माह ₹15,000 से बढ़ाकर ₹25,000 करने का आदेश दिया गया। यह मामला एक दंपती के विवाह से संबंधित है, जो 7 मई, 2023 को नई दिल्ली में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। चंपावत के परिवार न्यायालय ने पहले पत्नी को प्रति माह ₹8,000 का भरण-पोषण दिया था, लेकिन पत्नी ने इससे असंतोष जताते हुए उत्तराखंड उच्च न्यायालय में अपील की, जिसने भरण-पोषण की राशि बढ़ाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि भरण-पोषण उचित, तर्कसंगत और पति की वित्तीय क्षमता के अनुसार होना चाहिए।
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इस निर्णय से महिलाओं के लिए भरण-पोषण की राशि में वृद्धि होगी, जिससे उन्हें बेहतर जीवन जीने का अवसर मिलेगा।
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