बीएचयू में प्रो. एचसी वर्मा ने छात्रों को दी प्रेरणा, विज्ञान में मातृभाषा के महत्व पर जोर
BHU: प्रो. एचसी वर्मा बोले- 10 साल तक नहीं देखा स्कूल, छठी से नौवीं तक चार बार हुआ फेल; एक घंटे तक दिया लेक्चर
Amar Ujala
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बीएचयू के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी और प्रो. एचसी वर्मा ने विज्ञान शिक्षा में मातृभाषा के महत्व पर जोर दिया। प्रो. वर्मा ने छात्रों को एआई के अधिक उपयोग से सावधान किया और उन्हें अपने दिमाग का उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।
- 01मातृभाषा में विज्ञान का प्रसार समाज में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देता है।
- 02प्रो. एचसी वर्मा ने छात्रों को एआई के अधिक उपयोग से सावधान किया।
- 03विज्ञान रटने की बजाय प्रकृति को महसूस करने और सवाल पूछने की विधा है।
- 04छात्रों को अपनी शक्तियों पर विश्वास करना चाहिए और पैकेज के पीछे नहीं भागना चाहिए।
- 05अचिंत्य 5.0: महिला विशेषांक का लोकार्पण किया गया।
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बीएचयू (बनारस हिंदू विश्वविद्यालय) के कुलपति प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि मातृभाषा में विज्ञान का प्रसार समाज में वैज्ञानिक विचारों को विकसित करने में महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर प्रो. एचसी वर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि एआई का अधिक उपयोग उनके दिमाग को कुंद कर सकता है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे किताबों से बाहर निकलकर अपने आसपास की दुनिया को भौतिकी के दृष्टिकोण से देखें। प्रो. वर्मा ने कहा कि विज्ञान रटने की बजाय सवाल पूछने और प्रकृति को समझने का माध्यम है। इस कार्यक्रम में 'अचिंत्य 5.0: महिला विशेषांक' का लोकार्पण भी किया गया, जिसका अनुवाद बांग्ला, तमिल और अंग्रेजी में भी किया गया है।
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यह कार्यक्रम छात्रों को विज्ञान में मातृभाषा के महत्व और सोचने की स्वतंत्रता के प्रति जागरूक करता है।
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