भारत में लोकसभा सीटों की संख्या में बदलाव: एक ऐतिहासिक दृष्टिकोण
पहली बार नहीं बढ़ रहीं संसद में सीटें, 1947 में 489 सीटों के लिए हुआ था चुनाव, तब से 5 बार बदल चुका नंबर
Aaj Tak
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महिला आरक्षण बिल और परिसीमन पर संसद में बहस चल रही है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। 1947 के बाद से सीटों की संख्या में कई बार बदलाव हुआ है, और वर्तमान में यह 543 है। अगर संख्या बढ़ती है, तो यह छठी बार होगा।
- 01महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन पर बहस जारी है।
- 02लोकसभा की सीटों की संख्या 543 है, जो 1980 से स्थिर है।
- 03पहला आम चुनाव 1951-52 में 489 सीटों के लिए हुआ था।
- 041976 में सीटों की संख्या को 'फ्रीज' किया गया था, जो 2026 तक जारी रहेगा।
- 05यदि सीटों की संख्या बढ़ती है, तो यह छठी बार होगा जब संख्या में बदलाव होगा।
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महिला आरक्षण बिल के साथ परिसीमन पर संसद में बहस चल रही है। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं, जो 1980 से स्थिर हैं। भारत में पहले आम चुनाव का आयोजन 1951-52 में 489 सीटों के लिए किया गया था। इसके बाद, सीटों की संख्या में कई बार बदलाव हुआ। 1957 में यह बढ़कर 494 हो गई, फिर 1967 में 520 और 1977 में 542 पहुंच गई। 1980 में यह संख्या स्थायी रूप से 543 हो गई। 1976 में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए सीटों की संख्या को 'फ्रीज' कर दिया गया, जो अब 2026 तक जारी रहेगा। अब जब सीटों की संख्या बढ़ाने की संभावना पर चर्चा हो रही है, तो यह छठी बार होगा जब लोकसभा सीटों की संख्या में परिवर्तन होगा। यह केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रतिनिधित्व, राज्यों के बीच शक्ति संतुलन और लोकतंत्र की गुणवत्ता से भी जुड़ा है।
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यदि संसद में सीटों की संख्या बढ़ती है, तो यह विभिन्न राज्यों के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव ला सकता है।
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