चीयरलीडर्स की असल जिंदगी: ग्लैमर के पीछे की मेहनत
हर चौके-छक्के पर 5 घंटे तक ठुमके... चीयरलीडर्स की जिंदगी आसान नहीं, जितनी दिखती है
Aaj Tak
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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की चीयरलीडर्स की जिंदगी ग्लैमर से भरी लगती है, लेकिन असलियत में यह एक हाई-इंटेंसिटी प्रोफेशन है। उन्हें हर मैच में परफॉर्म करने के लिए लगातार यात्रा, कम नींद और शारीरिक मेहनत का सामना करना पड़ता है।
- 01चीयरलीडिंग एक हाई-इंटेंसिटी प्रोफेशन है, जिसमें लगातार ऊर्जा बनाए रखना जरूरी है।
- 02चीयरलीडर्स को प्रति मैच ₹12,000 से ₹25,000 तक का भुगतान किया जाता है।
- 03भर्ती प्रक्रिया में डांस ऑडिशन और फिटनेस टेस्ट शामिल होते हैं।
- 04चीयरलीडिंग की शुरुआत अमेरिका में 1898 में हुई थी।
- 05हर सीजन में नई भर्ती होती है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ जाती है।
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इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में चीयरलीडर्स का काम सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक कठिन प्रोफेशन है। चीयरलीडर्स को हर मैच में ऊर्जा बनाए रखने के लिए लगातार यात्रा और कम नींद का सामना करना पड़ता है। अमेरिका की रेटेल हॉल (Rachel Hall) के अनुसार, नींद की कमी सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि कई बार उन्हें रात 2 बजे की फ्लाइट लेकर सीधे मैदान में आना होता है। साउथ अफ्रीका की साकिया पान (Saskia Pann) कहती हैं कि यह काम सालों की ट्रेनिंग और अनुशासन का परिणाम है। चीयरलीडर्स को प्रति मैच ₹12,000 से ₹25,000 तक का भुगतान किया जाता है, लेकिन इसके साथ ही उन्हें फिटनेस का दबाव और हर समय परफॉर्म करने की मजबूरी का सामना करना पड़ता है। भर्ती प्रक्रिया में डांस ऑडिशन, फिटनेस टेस्ट और कैमरा प्रेजेंस का आकलन शामिल होता है। इस प्रोफेशन में स्थायित्व की कोई गारंटी नहीं होती, क्योंकि हर सीजन नई भर्ती होती है।
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चीयरलीडर्स की मेहनत और संघर्ष दर्शकों को एक बेहतर मनोरंजन अनुभव प्रदान करते हैं।
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