खाड़ी देशों में तनाव से भारत के प्याज निर्यात में गिरावट, किसानों पर असर
खाड़ी देशों में तनाव का प्याज किसानों पर सीधा असर, निर्यात में गिरावट; घरेलू मांग कमजोर
Jagran
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खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण भारत के प्याज निर्यात में 30% की गिरावट आई है। इस स्थिति ने किसानों को लागत से भी कम कीमत पर प्याज बेचने के लिए मजबूर किया है, जिससे उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए बाजार से प्याज खरीदने के निर्देश दिए हैं।
- 01खाड़ी देशों में तनाव से प्याज निर्यात में 30% की गिरावट आई।
- 02किसान लागत से आधी कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर हैं।
- 03शिपिंग खर्च में वृद्धि ने निर्यात को घाटे का सौदा बना दिया है।
- 04घरेलू मांग में कमी और होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर की धीमी रफ्तार से स्थिति और खराब हुई।
- 05सरकार ने प्याज का बफर स्टॉक बनाने के लिए एजेंसियों को निर्देश दिए हैं।
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खाड़ी देशों में तनाव ने भारत के प्याज बाजार को प्रभावित किया है, जिससे प्याज निर्यात में 30% की गिरावट आई है। इस स्थिति के कारण किसानों को अपनी लागत से भी कम कीमत पर प्याज बेचना पड़ रहा है, जिससे उनकी आमदनी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्याज की कीमतें थोक बाजार में 800 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक गिर गई हैं, जबकि उत्पादन लागत 1800 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल है। बढ़ते शिपिंग खर्च ने निर्यात को घाटे का सौदा बना दिया है, जिससे निर्यातक पीछे हट रहे हैं। इसके अलावा, होटल-रेस्टोरेंट सेक्टर की धीमी रफ्तार और पारंपरिक खरीदारों की खरीद में कमी ने घरेलू मांग को और कमजोर किया है। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (एनसीसीएफ) और राष्ट्रीय कृषि विपणन संघ (नेफेड) जैसी एजेंसियों को प्याज खरीदने के निर्देश दिए हैं।
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किसानों की आमदनी पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है और वे लागत से कम कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर हैं।
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