घर के ईशान कोण की दिशा: सकारात्मक ऊर्जा के लिए क्या करें और क्या न करें
घर की ये दिशा होती है सबसे शुभ, न रखें ये चीजें, बढ़ सकती हैं परेशानियां
Aaj Tak
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वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर की उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत है। इस दिशा में टॉयलेट, भारी फर्नीचर या किचन न बनाना चाहिए, क्योंकि इससे नकारात्मकता बढ़ सकती है। पूजा या ध्यान के लिए यह दिशा सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
- 01उत्तर-पूर्व दिशा को वास्तु में सबसे पवित्र माना जाता है।
- 02इस दिशा में टॉयलेट या बाथरूम नहीं होना चाहिए।
- 03भारी फर्नीचर रखने से ऊर्जा का प्रवाह रुक सकता है।
- 04किचन के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा बेहतर होती है।
- 05ईशान कोण में पूजा-पाठ के लिए स्थान बनाना शुभ है।
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वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा, जिसे ईशान कोण कहा जाता है, को सबसे पवित्र माना गया है। यह दिशा सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य स्रोत है, जो घर में सुख, शांति और समृद्धि लाने में मदद करती है। इस दिशा को हमेशा साफ और खुला रखना चाहिए। टॉयलेट या बाथरूम का होना नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकता है, जिससे मानसिक तनाव और आर्थिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसके अलावा, भारी फर्नीचर या अलमारी रखने से ऊर्जा का प्रवाह रुक सकता है, जिससे जीवन में रुकावटें आ सकती हैं। किचन के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा अधिक उपयुक्त मानी जाती है। इस दिशा में पूजा या ध्यान के लिए स्थान बनाना शुभ होता है, जिससे घर में सकारात्मकता बनी रहती है।
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अगर घर में वास्तु के अनुसार दिशा का ध्यान नहीं रखा गया, तो यह मानसिक तनाव और पारिवारिक अशांति का कारण बन सकता है।
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