इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तंजील अहमद हत्याकांड में आरोपी को दी राहत
जब DSP को मारी गईं थीं ताबड़तोड़ गोलियां...तंजील अहमद हत्याकांड की कहानी
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के तंजील अहमद हत्याकांड में आरोपी रैयान को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों को साबित नहीं कर सका। इस मामले में एनआईए अधिकारी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या हुई थी।
- 01इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रैयान को सभी आरोपों से बरी किया।
- 02तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या 2 अप्रैल 2016 को हुई थी।
- 03निचली अदालत ने रैयान को मौत की सजा सुनाई थी।
- 04कोर्ट ने साक्ष्यों की कमी को प्रमुख कारण बताया।
- 05मुख्य आरोपी मुनीर की पहले ही मौत हो चुकी है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2016 के तंजील अहमद हत्याकांड में आरोपी रैयान को राहत देते हुए उसे सभी आरोपों से बरी कर दिया है। जस्टिस सिद्धार्थ की सिंगल बेंच ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष साक्ष्यों को संदेह से परे साबित नहीं कर सका। तंजील अहमद, जो एनआईए के अधिकारी थे, और उनकी पत्नी फरजाना की हत्या 2 अप्रैल 2016 को बिजनौर के श्योहारा में हुई थी। उस रात, जब वे एक निकाह समारोह से लौट रहे थे, मोटरसाइकिल सवार हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग की। तंजील की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी ने 10 दिन बाद दम तोड़ा। ट्रायल कोर्ट ने 2022 में रैयान और मुनीर को दोषी मानते हुए मौत की सजा सुनाई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने पाया कि निचली अदालत ने साक्ष्यों को समझने में गंभीर चूक की। अंततः, रैयान को 7 अप्रैल 2016 से जेल में रहने के बाद सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया।
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इस फैसले से न्याय प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं और यह दर्शाता है कि साक्ष्यों की कमी के कारण निर्दोष लोगों को सजा नहीं मिलनी चाहिए।
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