जगजीवन राम: दो बार प्रधानमंत्री बनने से चूके दलित नेता की कहानी
जब दो बार देश का प्रधानमंत्री बनते-बनते रह गए जगजीवन राम, जानिए सबसे लंबे समय तक सांसद रहने वाले नेता की कहानी
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
बाबू जगजीवन राम, जिनका जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के चंदवा गांव में हुआ था, ने अपने जीवन को समानता और न्याय के लिए समर्पित किया। वे 1989 तक लगातार सांसद रहे और दो बार प्रधानमंत्री बनने के करीब पहुंचे, लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण सफल नहीं हो सके।
- 01जगजीवन राम का जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के चंदवा गांव में हुआ था।
- 02उन्होंने 1989 तक लगातार संसद के सदस्य रहने का रिकॉर्ड बनाया।
- 031977 में प्रधानमंत्री बनने के लिए उन्हें सर्वाधिक समर्थन मिला था, लेकिन मधु लिमए के विरोध के कारण वे असफल रहे।
- 041979 में फिर से प्रधानमंत्री बनने का अवसर आया, लेकिन राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने लोकसभा भंग कर दी।
- 05जगजीवन राम का जीवन समानता और न्याय के लिए संघर्ष का प्रतीक है।
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बाबू जगजीवन राम, जिनका जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के चंदवा गांव में हुआ था, ने अपने जीवन को समाज में समानता और न्याय फैलाने के लिए समर्पित किया। उन्हें 'बाबूजी' के नाम से भी जाना जाता था और वे 1989 तक लगातार सांसद रहे, जो कि भारतीय राजनीति में सबसे लंबे समय तक सांसद रहने का रिकॉर्ड है। 1977 में जब जनता पार्टी ने सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव किया, तो जगजीवन राम को सर्वाधिक सांसदों का समर्थन मिला। लेकिन मधु लिमए के विरोध के कारण वे प्रधानमंत्री नहीं बन सके। इसके बाद, 1979 में एक और अवसर आया, जब चौधरी चरण सिंह की सरकार गिरने वाली थी। इस बार भी राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी ने उन्हें बहुमत साबित करने का मौका नहीं दिया और लोकसभा भंग कर दी, जिससे वे प्रधानमंत्री बनने से चूक गए। जगजीवन राम का जीवन और उनकी राजनीतिक यात्रा आज भी दलित नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
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