अमेरिकी नाकाबंदी और ईरान-ट्रंप वार्ता: पाकिस्तान की भूमिका पर नजर
नाकाबंदी, पाकिस्तान में वार्ता और चीन की एंट्री: होर्मुज के बहाने क्या चाल चल रहे ट्रंप, भारत को रहना होगा अलर्ट?
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अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच वार्ता की संभावना बढ़ रही है। पाकिस्तान वार्ता की मेज़बानी करने के लिए प्रयासरत है, जबकि चीन ने नाकाबंदी को खतरनाक बताया है। वैश्विक बाजार में राहत के संकेत हैं, लेकिन ईरान की सुरक्षा चिंताएं बनी हुई हैं।
- 01अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता पाकिस्तान में हो सकती है।
- 02चीन ने होर्मुज नाकाबंदी को गैरजिम्मेदाराना बताया है।
- 03ईरान की सुरक्षा चिंताओं के कारण वार्ता इस्लामाबाद में होने की संभावना है।
- 04अमेरिका ने नाकाबंदी के दौरान 12 युद्धपोत तैनात किए हैं।
- 05ईरान ने नाकाबंदी को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकाबंदी और ईरान के साथ वार्ता की तैयारियों के बीच पाकिस्तान की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच वार्ता इस्लामाबाद में होने की संभावना है। चीन ने इस नाकाबंदी को खतरनाक और गैरजिम्मेदाराना बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि वार्ता सफल नहीं होती तो स्थिति बिगड़ सकती है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं, जिससे राहत के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, ईरान ने नाकाबंदी को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए इसे गंभीर चिंता का विषय माना है। ईरान के गृह मंत्री ने कहा है कि नाकाबंदी का देश पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि उनके पास अन्य आयात के रास्ते हैं।
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यदि वार्ता सफल होती है, तो इससे क्षेत्रीय स्थिरता में सुधार हो सकता है और कच्चे तेल की कीमतों में और कमी आ सकती है।
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