आर. वैरामुथु को ज्ञानपीठ पुरस्कार: विवाद और सम्मान का संगम
गीतकार वैरामुथु को क्यों मिला साहित्य का सम्मान? MeToo आंदोलन के समय 17 महिलाओं ने लगाए थे आरोप
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
तमिल फिल्मों के प्रसिद्ध गीतकार आर. वैरामुथु को ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है, जो भारतीय साहित्य और सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण है। हालांकि, MeToo आंदोलन के दौरान उन पर लगे आरोपों के कारण पुरस्कार को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ है।
- 01आर. वैरामुथु को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला, जो भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण घटना है।
- 02उनके गीतों ने तमिल सिनेमा में नई दिशा दी है, लेकिन उन्हें साहित्यिक पहचान कम मिली है।
- 03MeToo आंदोलन के दौरान 17 महिलाओं ने उन पर आरोप लगाए थे, जिससे विवाद उत्पन्न हुआ।
- 04विरोध के बावजूद, वैरामुथु के समर्थकों ने उन्हें पुरस्कार दिलाने के लिए लॉबिंग की थी।
- 05अमेरिका में रहने वाले तमिल लेखक ने पुरस्कार के खिलाफ असंतोष जताया है।
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आर. वैरामुथु, जो तमिल फिल्मों के प्रमुख गीतकार हैं, को हाल ही में ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार भारतीय साहित्य और सिनेमा के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन वैरामुथु पर MeToo आंदोलन के दौरान 17 महिलाओं द्वारा आरोप लगाए जाने के कारण विवाद भी खड़ा हुआ है। उनके गीतों ने तमिल सिनेमा में एक नई दिशा दी है, लेकिन साहित्यिक पहचान में उन्हें कम महत्व मिला है। उनके पहले गीत ने 1980 में एसपी बालासुब्रमण्यम द्वारा गाया गया था, और अब तक उन्होंने 10,000 से अधिक गाने लिखे हैं। हालांकि, उनके राजनीतिक नजदीकियों और विवादों के कारण कई लोग उनके पुरस्कार को लेकर असंतोष जता रहे हैं। कुछ तमिल साहित्यकारों ने इसके खिलाफ हस्ताक्षर अभियान चलाया है। अमेरिका में रहने वाले लेखक बी. जय मोहन ने भी ज्ञानपीठ कमिटी को पत्र लिखकर वैरामुथु के पुरस्कार को तमिल साहित्य का अनादर बताया है।
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यह पुरस्कार तमिल साहित्य और सिनेमा के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकता है।
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