आशा भोसले का विवादास्पद गाना 'दम मारो दम' और भारतीय संस्कृति पर प्रभाव
आशा भोसले का वो गाना जिसे माना गया भारतीय संस्कृति के खिलाफ, ऑल इंडिया रेडियो ने किया था बैन
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
आशा भोसले का गाना 'दम मारो दम' 1971 में विवादों में रहा और ऑल इंडिया रेडियो द्वारा बैन किया गया। इस गाने को नशे को glamorize करने वाला माना गया, जबकि इसका उद्देश्य हिप्पी संस्कृति और नशे की बुरी आदतों पर कटाक्ष करना था। आशा भोसले को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला।
- 01आशा भोसले का गाना 'दम मारो दम' 1971 में रिलीज हुआ था।
- 02गाने को नशे को glamorize करने के लिए भारतीय संस्कृति के खिलाफ करार दिया गया।
- 03ऑल इंडिया रेडियो ने इस गाने पर बैन लगाया था।
- 04आशा भोसले को इस गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला।
- 05गाने की लोकप्रियता आज भी बनी हुई है, और युवा पीढ़ी इसे सुनती है।
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आशा भोसले, जिन्हें 'सुरों की आशा' कहा जाता है, ने हिंदी सिनेमा को कई अमर गाने दिए हैं। उनका गाना 'दम मारो दम', जो 1971 में रिलीज हुआ, विवादों में रहा और इसे ऑल इंडिया रेडियो द्वारा बैन किया गया। इस गाने में जीनत अमान को हिप्पी स्टाइल में दिखाया गया था, और इसे नशे को glamorize करने वाला माना गया। हालांकि, गाने का उद्देश्य हिप्पी जीवनशैली और नशे की बुरी आदतों पर कटाक्ष करना था। विवादों के बावजूद, आशा भोसले की जादुई आवाज ने इस गाने को अमर बना दिया, जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला। आज भी यह गाना युवा पीढ़ी के बीच लोकप्रिय है।
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