पटना में गैस सिलिंडर की किल्लत से छात्रों और मजदूरों को हो रही परेशानी
पटना में ‘छोटू’ व कमर्शियल गैस सिलिंडर की किल्लत, छात्र और मजदूरों के सामने खाने के लाले
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पटना, बिहार में छोटे और कमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे छात्रों, मजदूरों और छोटे व्यवसायों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। गैस की किल्लत के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं और कई लोग सामूहिक रसोई का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
- 01पटना में छोटे गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में कमी आई है।
- 02छात्रों और मजदूरों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
- 03गैस की किल्लत के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं।
- 04कुछ रेस्टोरेंट और ढाबे गैस बचाने के लिए संचालन में बदलाव कर रहे हैं।
- 05अस्थायी रूप से लकड़ी और कोयला का उपयोग किया जा रहा है।
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पटना, बिहार में छोटे और कमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति में कमी ने छात्रों, मजदूरों और छोटे व्यवसायियों के लिए गंभीर समस्याएँ पैदा कर दी हैं। पिछले एक सप्ताह से छोटू सिलिंडरों की आपूर्ति में कमी आई है, जिससे ठेला-रेहड़ी संचालक और छोटे रेस्टोरेंट गैस के सीमित उपयोग के लिए मजबूर हैं। राजधानी में लगभग 20,000 आधिकारिक ग्राहक हैं, जबकि 1,00,000 से अधिक अनधिकृत ग्राहक हैं। गैस की किल्लत के कारण खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ गई हैं, जैसे कि समोसा की कीमत 15 रुपये और आमलेट की कीमत 30 रुपये हो गई है। छात्रों ने बताया कि कई लोग गैस की कमी के कारण अपने गांव लौट गए हैं। इसके अलावा, मकान मालिकों द्वारा इंडक्शन या हीटर के उपयोग पर रोक लगाने से भी समस्याएँ बढ़ गई हैं।
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गैस सिलिंडर की किल्लत से छात्रों और मजदूरों को भोजन की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी दैनिक जीवनशैली प्रभावित हो रही है।
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