टीकमगढ़ में अवैध ग्रेनाइट खनन का मामला: विधानसभा में उठी आवाज़, जांच समिति का गठन
टीकमगढ़ में अवैध ग्रेनाइट खनन का खुलासा: तीन साल तक वन क्षेत्र में चलता रहा खेला, विधानसभा में गूंजा मुद्दा
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
टीकमगढ़, मध्य प्रदेश में तीन साल तक अवैध ग्रेनाइट खनन का मामला सामने आया है, जहां करोड़ों रुपये का ग्रेनाइट निकाला गया। विधानसभा में मामला उठने के बाद, मध्य प्रदेश सरकार ने जांच के लिए तीन भारतीय वन सेवा अधिकारियों की समिति का गठन किया है।
- 01टीकमगढ़ के बेदोरा जंगल में तीन साल तक अवैध ग्रेनाइट खनन किया गया।
- 02ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
- 03मध्य प्रदेश विधानसभा में मामला उठाने पर जांच समिति का गठन किया गया।
- 04खनन माफिया को राजनीतिक संरक्षण मिलने के संकेत।
- 05वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत की आशंका।
Advertisement
In-Article Ad
टीकमगढ़ जिले के बेदोरा जंगल में तीन साल तक अवैध ग्रेनाइट खनन का मामला उजागर हुआ है, जिसमें करोड़ों रुपये का ग्रेनाइट निकाला गया और बेचा गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बार-बार प्रशासन और वन विभाग को शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। जब मामला मध्य प्रदेश विधानसभा में उठाया गया, तो सरकार ने भारतीय वन सेवा के तीन अधिकारियों की एक समिति का गठन किया। इस खनन में पोकलेन और विस्फोटक का उपयोग किया गया, जिससे वन्य जीवों की मौत भी हुई। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह सब राजनीतिक संरक्षण के तहत हुआ है। टीकमगढ़ जिले के डीएफओ राजाराम परमार ने अवैध खनन की पुष्टि की है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
Advertisement
In-Article Ad
इस अवैध खनन से स्थानीय वन्य जीवों को नुकसान हुआ है और क्षेत्र के पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




