उत्तराखंड में अंतिम संस्कार के लिए सूखी लकड़ियों की कमी, पिता ने टायर और डीजल से दी बेटी को विदाई
उत्तराखंड: चिता को आग देने के लिए नहीं मिली सूखी लकड़ियां, 19 साल की बेटी का डीजल-टायर से हुआ अंतिम संस्कार
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उत्तराखंड के श्रीनगर में एक पिता को अपनी 19 वर्षीय बेटी का अंतिम संस्कार करने के लिए सूखी लकड़ियों की कमी का सामना करना पड़ा। मजबूरन, उन्होंने टायर, डीजल और पुराने कपड़ों का उपयोग कर चिता को जलाया, जिससे स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठे हैं।
- 0119 वर्षीय युवती का आकस्मिक निधन हुआ।
- 02अंतिम संस्कार के लिए सूखी लकड़ियों की कमी के कारण टायर और डीजल का इस्तेमाल किया गया।
- 03स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों में आक्रोश।
- 04नगर निगम ने मामले की जांच के आदेश दिए।
- 05सरकारी लकड़ी टाल की मांग उठाई गई।
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उत्तराखंड के श्रीनगर में एक हृदयविदारक घटना में, एक पिता को अपनी 19 वर्षीय बेटी का अंतिम संस्कार करने के लिए सूखी लकड़ियों की कमी का सामना करना पड़ा। मृतक के परिजनों ने अलकेश्वर घाट पर अंतिम संस्कार के लिए लकड़ियां खरीदीं, लेकिन गीली लकड़ियों के कारण चिता नहीं जल सकी। चार घंटे की कोशिशों के बाद, परिवार ने 15 लीटर डीजल, पुराने टायर, कपड़े और गद्दे का सहारा लिया। इस घटना ने स्थानीय प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। वार्ड पार्षद शुभम प्रभाकर ने नगर निगम मेयर को पत्र लिखकर घटना की निंदा की और सरकारी लकड़ी टाल की व्यवस्था की मांग की। नगर निगम की मेयर आरती भंडारी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
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इस घटना ने स्थानीय समुदाय में प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, जिससे भविष्य में अंतिम संस्कार की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।
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