सविता प्रधान: संघर्ष से कमिश्नर बनने तक की प्रेरणादायक यात्रा
'बाल्टी में पेशाब करके मुझपर फेंक दिया, शरीर पर जलने-कटने के निशान...', इन हालातों से लड़कर कमिश्नर बनीं सविता
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
सविता प्रधान, जो मध्य प्रदेश के सिंगरौली नगर निगम की कमिश्नर हैं, ने घरेलू हिंसा और कठिनाइयों का सामना करते हुए अपनी शिक्षा पूरी की और सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल की। उनका संघर्ष न केवल उनकी व्यक्तिगत यात्रा है, बल्कि यह दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
- 01सविता प्रधान ने 16 साल की उम्र में शादी की और घरेलू हिंसा का सामना किया।
- 02उन्होंने अपने बच्चों की परवरिश के साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की।
- 03सविता ने पहले प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास की।
- 04वह अब गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए काम करती हैं।
- 05उनकी कहानी संघर्ष और साहस का प्रतीक है।
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सविता प्रधान, जो मध्य प्रदेश के सिंगरौली नगर निगम की कमिश्नर हैं, ने अपने जीवन में कई कठिनाइयों का सामना किया। आदिवासी परिवार में जन्मी सविता ने 16 साल की उम्र में शादी की, जहां उन्हें घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपने पति के अत्याचारों के बावजूद अपनी शिक्षा जारी रखी और अपने बच्चों की परवरिश की। सविता ने पहले प्रयास में मध्य प्रदेश राज्य सिविल सेवा परीक्षा पास की और एक सरकारी अधिकारी बन गईं। अब, वे अपने पद का उपयोग गरीब समुदायों की महिलाओं और लड़कियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने में कर रही हैं। उनकी कहानी न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्ष की है, बल्कि यह उन सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं।
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सविता प्रधान का संघर्ष और सफलता अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है, जो घरेलू हिंसा और शैक्षिक बाधाओं का सामना कर रही हैं।
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