योगाभ्यास से तन, मन और आत्मा की शुद्धि: रविंद्र सिंह
तन, मन और आत्म शुद्धि के लिए करें योगाभ्यास : रविंद्र सिंह
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
भारतीय योग संस्थान का 60वां स्थापना दिवस कंकरखेड़ा, उत्तर प्रदेश में मनाया गया। वरिष्ठ योग शिक्षक रविंद्र सिंह चौहान ने योग के महत्व पर जोर दिया और कहा कि यह तन, मन और आत्मा की शुद्धि के लिए आवश्यक है। संस्था ने 4500 निशुल्क केंद्रों के माध्यम से समाज को योग शिक्षा प्रदान की है।
- 01भारतीय योग संस्थान का 60वां स्थापना दिवस मनाया गया।
- 02योगाभ्यास से तन, मन और आत्मा की शुद्धि संभव है।
- 03संस्थान ने 4500 निशुल्क योग केंद्र स्थापित किए हैं।
- 04कार्यक्रम में विभिन्न योग शिक्षकों ने आसन और प्राणायाम का अभ्यास कराया।
- 05योग गीत और भजनों ने भक्तिमय वातावरण बनाया।
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भारतीय योग संस्थान ने कंकरखेड़ा, उत्तर प्रदेश में अपने 60वें स्थापना दिवस का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना और संस्थापक प्रकाशलाल के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। वरिष्ठ योग शिक्षक रविंद्र सिंह चौहान ने योग के महत्व को उजागर करते हुए कहा कि योगाभ्यास से तन, मन और आत्मा की शुद्धि संभव है। उन्होंने स्वस्थ जीवन के लिए योग को दिनचर्या में शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर जिला प्रधान सुनील राघव ने बताया कि संस्था की स्थापना प्रकाशलाल और जवाहरलाल ने की थी, और आज यह संस्था लगभग 4500 निशुल्क केंद्रों के माध्यम से समाज को योग शिक्षा प्रदान कर रही है। कार्यक्रम में विभिन्न योग शिक्षकों ने सूक्ष्म क्रियाएं, आसन, प्राणायाम और ध्यान का अभ्यास कराया। इसके अलावा, हास्य आसनों के माध्यम से यशपाल एस जांगिड़ ने उपस्थित लोगों को तनावमुक्त किया। भजनों और योग गीतों ने कार्यक्रम का माहौल भक्तिमय बना दिया।
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यह कार्यक्रम स्थानीय समुदाय में योग के महत्व को बढ़ावा देता है और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाता है।
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