दिल्ली में 13 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता के मामले में दोषी को 25 साल की सजा
दिल्ली: दुष्कर्म पीड़िता के पलटने के बावजूद दोष साबित, DNA रिपोर्ट के आधार कोर्ट ने सुनाई 25 साल की सजा
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दिल्ली में एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में उसके मौसेरे भाई को 25 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने पीड़िता को 14.50 लाख रुपये मुआवजा देने का भी आदेश दिया। वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेष रूप से डीएनए रिपोर्ट, मामले में निर्णायक साबित हुई।
- 01दोषी को 25 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
- 02पीड़िता को 14.50 लाख रुपये मुआवजा दिया जाएगा।
- 03दोषी मौसेरे भाई पर आरोप था कि उसने कई बार दुष्कर्म किया।
- 04अदालत ने डीएनए रिपोर्ट को निर्णायक साक्ष्य माना।
- 05पीड़िता और उसकी मां ने ट्रायल के दौरान अपने बयानों से मुकरने के बावजूद मामला खारिज नहीं हुआ।
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दिल्ली के तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया ने 13 वर्षीय नाबालिग से दुष्कर्म और गर्भवती करने के मामले में उसके मौसेरे भाई को 25 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने दोषी पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और पीड़िता को 14.50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला विश्वास के घोर उल्लंघन का है, जहां पीड़िता को सुरक्षा मिलनी चाहिए थी, वहीं उसके साथ अपराध हुआ। ट्रायल के दौरान पीड़िता और उसकी मां अपने पूर्व बयानों से मुकर गईं, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल इसी आधार पर अभियोजन के मामले को खारिज नहीं किया जा सकता। वैज्ञानिक साक्ष्य, विशेष रूप से डीएनए रिपोर्ट, को अत्यंत विश्वसनीय और निर्णायक माना गया। जांच में पता चला कि आरोपित ने कई बार दुष्कर्म किया और पीड़िता उस समय अपनी मौसी के घर रह रही थी।
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इस निर्णय से समाज में दुष्कर्म के मामलों में न्याय की उम्मीद बढ़ी है और पीड़ितों को समर्थन मिलने की संभावना है।
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