पाकिस्तान की कूटनीति पर संकट: ईरान युद्ध के बीच आर्थिक दबाव बढ़ा
डिप्लोमेसी तार-तार... अर्थव्यवस्था बंटाधार, ईरान युद्ध के बीच PAK पर दोहरी मार
Aaj Tak
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पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन ईरान ने अमेरिका की शर्तें अस्वीकार कर दीं। इसके चलते सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगियों से तनाव बढ़ा है, जिससे पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव पड़ा है।
- 01पाकिस्तान ने अमेरिका-ईरान युद्ध में मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन असफल रहा।
- 02ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका की 15 शर्तों को अस्वीकार किया।
- 03संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज तुरंत लौटाने को कहा।
- 04पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही कमजोर है और इस संकट से और प्रभावित हुई है।
- 05भारत ने संतुलित कूटनीति अपनाते हुए अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा की।
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पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की कोशिश की, लेकिन ईरान ने अमेरिका की 15 शर्तों को अस्वीकार कर दिया। इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगियों के साथ तनाव बढ़ गया है, खासकर जब यूएई ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर (लगभग 2.9 लाख करोड़ रुपये) का कर्ज तुरंत लौटाने को कहा। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही संकट में है, और इस नई स्थिति ने उसे और अधिक दबाव में डाल दिया है। इस बीच, भारत ने संतुलित कूटनीति अपनाते हुए अपने ऊर्जा हितों की सुरक्षा की है। पाकिस्तान की कोशिशें अब तक असफल रही हैं, जिससे उसकी सीमित कूटनीतिक क्षमता उजागर हुई है।
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पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव के कारण आम नागरिकों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है।
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