ओडिशा के प्लास्टिक उद्योग पर पश्चिम एशिया के संघर्ष का प्रभाव
युद्ध वहां, बर्बादी यहां: पश्चिम एशिया की जंग ने ओडिशा के प्लास्टिक उद्योग की तोड़ी कमर, कारखानों में सन्नाटा
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पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण ओडिशा के बालासोर में प्लास्टिक उद्योग में भारी गिरावट आई है। कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण कारखाने बंद हो रहे हैं, जिससे हजारों श्रमिक बेरोजगार हो रहे हैं। इस संकट का असर राज्य के आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा है।
- 01पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण ओडिशा के प्लास्टिक उद्योग में उत्पादन में 70% की कमी आई है।
- 02बालासोर में 1500 श्रमिकों में से केवल 800 ही काम कर रहे हैं, जिससे बेरोजगारी बढ़ रही है।
- 03कच्चे माल की कीमतों में 75% तक की वृद्धि हुई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है।
- 0456 प्लास्टिक उत्पादों से संबंधित इकाइयों में भारी गिरावट आई है, 40% से अधिक बंद हो चुकी हैं।
- 05भारत का प्लास्टिक प्रॉसेसिंग क्षेत्र 50 लाख लोगों को रोजगार देता है, जो अब संकट में है।
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पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्षों का ओडिशा के बालासोर स्थित प्लास्टिक उद्योग पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। कच्चे माल की कमी और कीमतों में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण उत्पादन में 70% की कमी आई है। यहां के औद्योगिक क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों की संख्या सामान्य दिनों में 1500 से घटकर 800 रह गई है, जिससे बेरोजगारी की समस्या बढ़ रही है। जगदम्बा पॉलिमर्स लिमिटेड जैसे बड़े निर्माताओं ने उत्पादन में भारी कटौती की है, और कई छोटी इकाइयां बंद हो गई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में 75% तक की वृद्धि ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। इस संकट का असर न केवल श्रमिकों पर, बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक विकास पर भी पड़ रहा है, जिससे 50 लाख लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है।
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ओडिशा के प्लास्टिक उद्योग में गिरावट से हजारों श्रमिक बेरोजगार हो रहे हैं, जिससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
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