शिमला में दृष्टिबाधितों का आंदोलन: 902 दिन बाद प्रदर्शनकारियों का सब्र टूटा
शिमला में 902 दिनों से जारी आंदोलन के बाद दृष्टिबाधितों का सब्र टूटा, सचिवालय से CM आवास तक पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी
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Image: Jagran
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दृष्टिबाधितों ने 902 दिनों से चल रहे आंदोलन के तहत सड़कों पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी सचिवालय से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे।
- 01दृष्टिबाधितों का आंदोलन 902 दिनों से जारी है।
- 02प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय से मुख्यमंत्री आवास तक मार्च निकालने का प्रयास किया।
- 03पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई।
- 04सरकार पर खाली पड़े बैकलॉग पदों को भरने का दबाव।
- 05प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि उनकी मांगें न मानी गईं तो उग्र आंदोलन करेंगे।
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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में दृष्टिबाधितों का आंदोलन 902 दिनों से जारी है। आज, प्रदर्शनकारियों ने सचिवालय से मुख्यमंत्री आवास ओक ओवर तक मार्च निकालने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। दृष्टिबाधित संघ के सदस्य राजेश ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार ने उनकी मांगों को नजरअंदाज किया है। वे विभिन्न सरकारी विभागों में दृष्टिबाधितों के लिए खाली पड़े बैकलॉग पदों को भरने की मांग कर रहे हैं। संघ का आरोप है कि सरकार ने उनकी सहारा पेंशन भी बंद कर दी है और हालिया बजट में भी उनके लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो वे उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
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यदि दृष्टिबाधितों की मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो यह उनके जीवन स्तर को और प्रभावित कर सकता है, खासकर आर्थिक सहायता के बिना।
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