ईरान-अमेरिका संघर्ष में पाकिस्तान की मध्यस्थता: शहबाज शरीफ और असीम मुनीर की भूमिका
ईरान और अमेरिका दोनों ने मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान पर क्यों किया भरोसा, मुनीर ने कौन सी जादू की छड़ी घुमाई?
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
ईरान और अमेरिका के बीच संभावित संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की है, जिसे 'इस्लामाबाद समझौता' कहा गया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर की भूमिका को दोनों देशों ने स्वीकार किया है, जिससे पाकिस्तान को एक भरोसेमंद मध्यस्थ माना गया है।
- 01पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के लिए मध्यस्थता की है।
- 02इस समझौते को 'इस्लामाबाद समझौता' नाम दिया गया है।
- 03अमेरिका के उप-राष्ट्रपति और ईरान के विदेश मंत्री बैठक में शामिल हो सकते हैं।
- 04फील्ड मार्शल असीम मुनीर को दोनों देशों ने मध्यस्थता में महत्वपूर्ण भूमिका दी है।
- 05पाकिस्तान के कूटनीतिक संबंधों के कारण उसे इस भूमिका के लिए चुना गया।
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इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच संभावित संघर्ष को रोकने के लिए पाकिस्तान ने मध्यस्थता की है, जिसे 'इस्लामाबाद समझौता' कहा गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के वार्ताकारों को एक बैठक के लिए आमंत्रित किया है, जिसमें अमेरिका की तरफ से उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान की तरफ से मोहम्मद-बाकिर गालिबफ शामिल हो सकते हैं। यह पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि है, जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान दोनों ने सराहा है। ट्रंप ने पाकिस्तान और फील्ड मार्शल असीम मुनीर को युद्धविराम के लिए श्रेय दिया है। इस मध्यस्थता से यह स्पष्ट होता है कि ईरान और अमेरिका, दोनों ने पाकिस्तान की भूमिका को एक भरोसेमंद मध्यस्थ के रूप में स्वीकार किया है। शहबाज शरीफ ने इस कदम का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि 'इस्लामाबाद वार्ता' स्थायी शांति की दिशा में सफल होगी।
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पाकिस्तान की मध्यस्थता से देश की कूटनीतिक स्थिति मजबूत होगी और क्षेत्र में स्थायी शांति की संभावना बढ़ेगी।
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