भारत की सेना पश्चिम एशिया संघर्ष से सीख रही है: नौसेना प्रमुख
आधुनिक युद्ध में बदल रहा खेल, पश्चिम एशिया संघर्ष से सीख रहा भारत: सेना प्रमुखों का आकलन
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भारतीय सशस्त्र बल पश्चिम एशिया संघर्ष से महत्वपूर्ण सबक सीखने की कोशिश कर रहे हैं। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि यह संघर्ष आधुनिक युद्ध की रणनीतियों को समझने में सहायक है। भारत की सुरक्षा चुनौतियाँ अब बहुआयामी हो गई हैं, जिन्हें एकीकृत सैन्य प्रतिक्रिया की आवश्यकता है।
- 01पश्चिम एशिया संघर्ष आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण अध्ययन है।
- 02भारतीय सशस्त्र बल भविष्य के अभियानों के लिए सबक निकालने की कोशिश कर रहे हैं।
- 03हाइब्रिड खतरों का समाधान एकल सेना से नहीं, बल्कि समन्वित प्रतिक्रिया से किया जाना चाहिए।
- 04भारत को बहुआयामी कार्यक्षेत्र अभियानों की तैयारी करनी चाहिए।
- 05आपरेशन सिंदूर ने भारतीय सेना की संयुक्तता और प्रगति को दर्शाया।
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नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा है कि पश्चिम एशिया संघर्ष आधुनिक युद्ध के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण है। भारतीय सशस्त्र बल इस संघर्ष से सबक लेने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें आपूर्ति श्रृंखलाओं के लचीलेपन पर ध्यान दिया जा रहा है। त्रिपाठी ने बताया कि हाइब्रिड खतरों का समाधान विभिन्न सेनाओं की समन्वित प्रतिक्रिया से किया जाना चाहिए। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत को बहुआयामी विशिष्ट कार्यक्षेत्र अभियानों की तैयारी करनी चाहिए, क्योंकि वर्तमान चुनौतियाँ डोमेन सीमाओं का सम्मान नहीं करतीं। जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने आपरेशन सिंदूर को भारतीय सेना की प्रगति का एक उदाहरण बताया, जो संयुक्त अभियान के संचालन के महत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब भौगोलिक सीमाओं से परे है और विभिन्न हितधारकों के बीच तालमेल पर निर्भर करता है।
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पश्चिम एशिया संघर्ष से सीखकर भारत अपनी सैन्य रणनीतियों को बेहतर बना सकता है, जिससे देश की सुरक्षा में सुधार होगा।
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